उत्तराखंड पीसीएसजे में 18वीं रैंक हासिल करने वाली रुचिका ने कहा कि त्वरित न्याय दिलाना ही उनकी प्राथमिकता में रहेगा। रुचिका ने यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में हासिल की है और उन्होंने इसका श्रेय अपने परिवार व गुरुओं को दिया है। वर्तमान में वे देहरादून में प्रैक्टिस कर रहीं थीं।
रुचिका ओल्ड डालनवाला निवासी शहर के प्रसिद्ध साइकिल व्यापारी स्वर्गीय रामचंद नरुला की बेटी हैं। उनके पिता के कारोबार (घंटाघर स्थित न्यू नरुला साइकिल्स) को अब उनके बड़े भाई समीर नरुला संभालते हैं।
रुचिका की पांच साल पहले सैन्य अधिकारी अर्पित से शादी हुई थी। वर्तमान में अर्पित मेजर रैंक पर हैं और रुड़की में तैनात हैं। रुचिका की अब एक साल की बेटी भी है। अपनी सफलता पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि छोटी बेटी होने के चलते पढ़ाई में बेहद मुश्किलें आती थीं। लेकिन, मायके और ससुराल में बेहतर सामंजस्य होने के चलते उनकी मेहनत आसान हो गई।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने प्रयाग आईएएस एकेडमी गुरु नितिन वशिष्ठ, मां राज नरुला, भाई समीर नरुला और पति मेजर अर्पित को दिया है। रुचिका बताती हैं कि इन सभी ने अपने अपने स्तर पर उनका हर वक्त साथ दिया है। रुचिका की स्कूलिंग ब्राइट लैंड स्कूल से, एलएलबी डीएवी पीजी कॉलेज से और एलएलएम लिब्रा कॉलेज देहरादून से हुई।
नथुवावाला निवासी दीप्ति पंत अपने चौथे प्रयास में जज बन गई। उत्तराखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में आठवीं रैंक हासिल करने वाली दीप्ति की प्राथमिकता गरीबों को न्याय दिलाना है। मौजूदा समय में दीप्ति सचिवालय के विधायी एवं संसदीय मामले में समीक्षा अधिकारी हैं।
मूलरूप से चमोली की रहने वाली दीप्ति पंत ने गोपेश्वर के राजकीय विधि महाविद्यालय से लॉ की पढ़ाई की। उनके पिता ओम प्रकाश लेखा निदेशालय से डिप्टी डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
जबकि उनकी माता शोभा पंत गृहणी हैं। दीप्ति ने बताया कि वह पहले भी तीन बार पीसीएसजे की परीक्षा दे चुकी हैं। बीते जून को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा की परीक्षा दी थी, लेकिन इंटरव्यू में रह गई थीं। बताया कि वह रोजाना पांच से छह घंटे पढ़ाई करती थीं।
शनिवार और रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण 10 से 12 घंटे पढ़ने में लगाती थीं। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ ही संघर्ष के दिनों में साथ देने वाले दोस्तों, सचिवालय कर्मचारियों को देती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकता गरीबों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। परिणाम आने के बाद दीप्ति को बधाई देने वालों का तांता लग गया। सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।