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पीसीएस-जे: वकील पिता से प्रेरणा लेकर जज बनी बेटी, गरीबों और जरूरतमंदों को न्याय दिलाना है लक्ष्य

Sat, 21 Dec 2019 10:13 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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शुभांगी - फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार के सहायक शासकीय अधिवक्ता नीरज गुप्ता की बड़ी बेटी शुभांगी गुप्ता ने पीसीएस-जे की परीक्षा पास करके जज बनीं हैं। शुभांगी का कहना है कि वह अपने पिता से प्रेरणा लेकर जज बनी हैं। 

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शुभांगी तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं। दिल्ली पब्लिक स्कूल रानीपुर से इंटर करने के बाद शुभांगी ने देहरादून के लॉ कालेज में एलएलबी की पढ़ाई की। एक साल तक दिल्ली में कोचिंग ली। पीसीएस-जे की परीक्षा में सफल होने के बाद शुभांगी ने बताया कि उनका एकमात्र लक्ष्य जज बनना ही था।

इसलिए वे इंटर करने के बाद से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में जुट गई थी। उनका कहना है कि मां प्रीति गुप्ता समेत पूरे परिवार के लोगों का उन्हें पूरा सहयोग मिला। शुभांगी ने बताया कि उनकी चचेरी बहन पायल गुप्ता जब आईआरएस के लिए चुनी गई तो मेरा हौसला और बढ़ गया।
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शुभांगी का कहना है कि उनका मकसद गरीबों और जरूरतमंदों को न्याय दिलाना है। शुभांगी गुप्ता के जज बनने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचे और बधाई दी। 

त्वरित न्याय होगी प्राथमिकता: रुचिका 

उत्तराखंड पीसीएसजे में 18वीं रैंक हासिल करने वाली रुचिका ने कहा कि त्वरित न्याय दिलाना ही उनकी प्राथमिकता में रहेगा। रुचिका ने यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में हासिल की है और उन्होंने इसका श्रेय अपने परिवार व गुरुओं को दिया है। वर्तमान में वे देहरादून में प्रैक्टिस कर रहीं थीं। 

रुचिका ओल्ड डालनवाला निवासी शहर के प्रसिद्ध साइकिल व्यापारी स्वर्गीय रामचंद नरुला की बेटी हैं। उनके पिता के कारोबार (घंटाघर स्थित न्यू नरुला साइकिल्स) को अब उनके बड़े भाई समीर नरुला संभालते हैं।

रुचिका की पांच साल पहले सैन्य अधिकारी अर्पित से शादी हुई थी। वर्तमान में अर्पित मेजर रैंक पर हैं और रुड़की में तैनात हैं। रुचिका की अब एक साल की बेटी भी है। अपनी सफलता पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि छोटी बेटी होने के चलते पढ़ाई में बेहद मुश्किलें आती थीं। लेकिन, मायके और ससुराल में बेहतर सामंजस्य होने के चलते उनकी मेहनत आसान हो गई।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने प्रयाग आईएएस एकेडमी गुरु नितिन वशिष्ठ, मां राज नरुला, भाई समीर नरुला और पति मेजर अर्पित को दिया है। रुचिका बताती हैं कि इन सभी ने अपने अपने स्तर पर उनका हर वक्त साथ दिया है। रुचिका की स्कूलिंग ब्राइट लैंड स्कूल से, एलएलबी डीएवी पीजी कॉलेज से और एलएलएम लिब्रा कॉलेज देहरादून से हुई।   
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दीप्ति पंत चौथे प्रयास में बनी जज 

नथुवावाला निवासी दीप्ति पंत अपने चौथे प्रयास में जज बन गई। उत्तराखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में आठवीं रैंक हासिल करने वाली दीप्ति की प्राथमिकता गरीबों को न्याय दिलाना है। मौजूदा समय में दीप्ति सचिवालय के विधायी एवं संसदीय मामले में समीक्षा अधिकारी हैं। 

मूलरूप से चमोली की रहने वाली दीप्ति पंत ने गोपेश्वर के राजकीय विधि महाविद्यालय से लॉ की पढ़ाई की। उनके पिता ओम प्रकाश लेखा निदेशालय से डिप्टी डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

जबकि उनकी माता शोभा पंत गृहणी हैं। दीप्ति ने बताया कि वह पहले भी तीन बार पीसीएसजे की परीक्षा दे चुकी हैं। बीते  जून को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा की परीक्षा दी थी, लेकिन इंटरव्यू में रह गई थीं। बताया कि वह रोजाना पांच से छह घंटे पढ़ाई करती थीं।

शनिवार और रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण 10 से 12 घंटे पढ़ने में लगाती थीं। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ ही संघर्ष के दिनों में साथ देने वाले दोस्तों, सचिवालय कर्मचारियों को देती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकता गरीबों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। परिणाम आने के बाद दीप्ति को बधाई देने वालों का तांता लग गया। सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। 
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