पांच भाई बहनों में अकमल तीसरे नंबर की है। अकमल का कहना है कि मेरी पढ़ाई में बार बार बांधाएं पैदा हुई। मां ने पढ़ाई का खर्च उठाने में कोई कमी नहीं रखी और मैंने भी हिम्मत नहीं हारी। मुझे जो सफलता मिली है कि उसके लिए मैं अपनी मां और शिक्षकों की आभारी हूं। अकमल का कहना है कि वह महिलाओं और गरीब तबके के लोगों को न्याय दिलाने के लिए कार्य करना चाहती है।
मां की आंखों से छलकेसंघर्ष के आंसू
अकमल की सफलता की खबर सुनते ही उसकी मां हाशिम बेगम के आंखें छलक आई। हाशिम बेगम का कहना है कि कई बार आर्थिक तंगी के चलते ऐसा भी लगता था कि अकमल की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाएगी। बेटी ने भी पूरा साथ दिया तो हर बाधा को हमने पार किया।
बधाई देने वालों का लगा तांता
अजमल जहां को बधाई देने के लिए शुक्रवार शाम से ही लोगों का तांता लगने लगा था। शनिवार को भी बड़ी संख्या में आसपास के लोगों ने उसके घर पहुंचकर उसकी सफलता पर खुशी जताई। जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि नसीम अंसारी, सामाजिक कार्यकर्ता सलीम अहमद, मोहम्मद मुस्तफा अंसारी, प्रधान जहीर हसन, मुर्सलीन, इरशाद, इब्राहिम आदि ने उसे बधाई दी।