पुलिस कार्य से किनारा कर चुके उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के पटवारियों की मांग अधर में लटक कर रह गई हैं। बदले हुए हालात में पर्वतीय पटवारियों ने भी मुखर न होने का फैसला कर लिया है। राजस्व का काम पटवारी कर रहे हैं पर पुलिस कार्य फिलहाल इन्होंने छोड़ रखा है।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पर्वतीय पटवारियों की मांगों को लेकर शासन स्तर पर उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी किया गया था। इस कमेटी ने पर्वतीय पटवारियों की मांगों को लेकर सुनवाई भी की पर अभी तक कमेटी किसी तरह की संस्तुति नहीं कर पाई है।
दूसरी ओर राजस्व पुलिस एक्ट भी न्याय की सहमति के बाद अब राजस्व विभाग के पास है। अभी तक इस एक्ट को जारी करने का भी विभाग केस्तर पर फैसला नही हो पाया है।
जारी रखेंगे आंदोलन
दूसरी ओर पर्वतीय पटवारियों ने भी बिना किसी शोर शराबे के अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला कर लिया है। पर्वतीय पटवारी महासंघ के संरक्षक बीपी जगूड़ी के मुताबिक पर्वतीय पटवारी पुलिस कार्य तभी करेंगे जब उन्हें पर्याप्त संसाधन दिए जाएंगे।
पटवारियों को पुलिस कार्य करने के लिए तो हथियार ही दिए गए हैं और न ही वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। पटवारी साफ कह चुके हैं कि संसाधन न होने तक पुलिस कार्य नहीं किया जाएगा।
एक्ट आने के बाद ही फैसला
ऐसे में अब गतिरोध समाप्त करने के लिए राजस्व पुलिस एक्ट के जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। पटवारियों का कहना है कि एक्ट के सामने आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि पटवारी पर्वतीय क्षेत्रों में पुलिस का काम करेंगे या नहीं।
फिलहाल पटवारी मुखर भी नहीं हैं। हड़ताल पर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद से इनकी ओर से चुप रहना ही बेहतर समझा जा रहा है।