पासपोर्ट सेवा केंद्र को पेपर लैस बनाया जा रहा है। उत्तराखंड क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। इससे पासपोर्ट आवेदक को जरूरी प्रमाण पत्रों की फोटोकाफी जमा नहीं करनी पड़ेगी। इसकी जगह पासपोर्ट कार्यालय के रिकार्ड में अब आवेदक की डिजिटल फाइल बनेगी।
ई गवर्नेंस और पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया के डिजिटिलाइजेशन के तहत विदेश मंत्रालय ने सभी पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) को पेपर लैस बनाने के निर्देश दिए थे। उत्तराखंड क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने गत 15 फरवरी को प्रयोग के तौर पर शुरू की इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया है।
अब फोटो कॉपी नहीं
अब पहले की तरह आवेदक को आईडी, एड्रेस प्रूफ, जन्म, शैक्षिक आदि प्रमाण पत्रों की फोटो कॉपी पीएसके में जमा नहीं करनी पड़ेगी। पीएसके बायोमीट्रिक जांच के वक्त जरूरी प्रमाण पत्र स्कैन कर आवेदक को लौटा देगा।
इसी तरह, बायोमीट्रिक जांच के बाद निकलने वाले दो पेज के डिक्लेरेशन फार्म में आवेदक के साइन कराकर पीएसके इसे भी स्कैन कर आवेदक को लौटा देगा। इन सभी प्रमाण पत्रों की स्कैन कापी को जरूरी दस्तावेज के तौर पर कागजी फाइल की जगह डिजिटल फाइल बनाकर पीएसके अपने रिकार्ड में रखेगा। इस तरह से पासपोर्ट सेवा केंद्र को कागजी फाइलों को संभालकर रखने के झंझट से भी मुक्ति मिल सकेगी।
इनका है कहना
देश के 37 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों के साथ उत्तराखंड में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। विशेष स्थितियों को छोड़कर अब आवेदक को प्रमाण पत्रों की फोटो कापी जमा नहीं करनी होगी। इन फोटो कापी को आवेदक दूसरी जगह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
-विजय शंकर पांडेय, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी