सरकारी अस्पतालों में आम मरीजों को दवा उपलब्ध न कराना मानवाधिकारों का हनन है। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में पिछले काफी समय से चल रहे दवाओं के संकट मामले की सुनवाई करते हुए मानवाधिकार आयोग ने यह टिप्पणी की। मामले में मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव और डीजी हेल्थ से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 मार्च को निर्धारित की गई है।
बजट दबाकर बैठे हैं सीएमओ
नेहरू कॉलोनी निवासी भूपेंद्र कुमार ने आयोग में शिकायत की थी कि राज्य के कई जिलों के सीएमओ ने दवा खरीद का बजट दबाकर रखा है। दवा खरीद का टेंडर जारी न होने से दवाओं का संकट पैदा हो गया है। आम मरीजों को सरकारी अस्पतालों में दवा नहीं मिल पा रही है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आयोग ने इसे गंभीर विषय मानते हुए सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने दवा संकट पर अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों की कटिंग आयोग के समक्ष पेश की।
डीजी हेल्थ ने मांगी सूची
आयोग ने प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक को आदेश दिए हैं कि वे अपने स्तर से सभी जिलों के सीएमओ से दवाइयों की सूची उपलब्ध कराएं। साथ ही मुख्य सचिव और स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देश दिए कि वह एक महीने के भीतर इस बारे में रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत कराना सुनिश्चित करें। आयोग ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 29 मार्च तय की है।