प्रधानाध्यापिका द्वारा नाबालिग की पिटाई करने और घायल हेोन की जानकारी पाकर बाल संरक्षण आयोग की सदस्य सीमा डोरा की अगुवाई में आयोग की टीम पहले स्कूल और फिर कोरोनेशन अस्पताल पहुंचकर घायल नाबालिग से पूछताछ कर घटना की जानकारी ली।
आयोग सदस्य सीमा डोरा ने बताया कि पूछताछ के दौरान सभी बच्चों ने इस बात का खुलासा किया कि प्रधानाध्यापिका नसीम बानो आए दिन बच्चों की पिटाई करती हैं । इतना ही नहीं आयोग सदस्य सीमा डोरा ने यह जानकारी भी दी की मारपीट की आरोपी प्रधानाध्यापिका बच्चों के साथ सांप्रदायिक भेदभाव भी रखती हैं आयोग सदस्या ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी और एसएसपी को आयोग की ओर से पत्र लिखा जा रहा है।
मुख्य शिक्षाधिकारी ने प्रधानाध्यापिका केा किया निलंबित
दूसरी ओर इस प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाध्यापिका नसीम बानो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही विभागीय अफसरों की टीम गठित कर प्रकरण की जांच करने के आदेश जारी किए हैं। मुख्य शिक्षाधिकारी का कहना हेै कि बच्चों के साथ मारपीट की घटना को कतई बर्दाश्त नही किया जा सकता है।
दूूसरी ओर इस घटना के बाद कोरोनेशन अस्पताल पहुंची कई महिलाओं ने अस्पताल में भी हंगामा किया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापिका नसीम बानो न सिर्फ छात्र छात्राओं की आए दिन पिटाई करती हैं वरन बच्चों से आए दिन पैसे भी मंगवाए जाते हैं। हंगामा कर रही महिलाओं ने मांग उठाई कि आरोपी प्रधानाध्यापिका नसीम बानो को निलंबित करने के साथ ही उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच की जाए।
घायल राहुल की मां अस्पताल में भर्ती
घटना का दुखद पहलू यह है कि प्रधानाध्यापिका की पिटाई से घायल राहुल की मां रेखा की तबियत पहले से ही खराब है और वह अस्पताल में भर्ती हैं। पीड़ित राहुल के पिता धर्मेंद्र ने बताया कि उसकी माली हालत ठीक नहीं है और जैसे तैसे परिवार का पालन पोषण करता है।
घटना के बाद सहमे बच्चे, शिक्षिकाओं ने बमुश्किल संभाला
घटना के बाद स्कूल में मौजूद तमाम बच्चे सहम गए। पहले प्रधानाध्यापिका द्वारा राहुल की पिटाई और फिर परिजनों और लोगों द्वारा हंगामा व प्रधानाध्यापिका के साथ हाथापाई की घटना देख स्कूल में मौजूद सभी छात्र सहम गए। तमाम छात्र स्कूल बैग लेकर स्कूल से निकल भागने लगे। जिन्हें अध्यापिकाओं ने बमुश्किल रोका संभाला। आखिरकार बाद में बच्चों को घर जाने दिया गया।