कारण जो भी रहा हो पर प्रदेश के करीब साठ हजार पंचायत प्रतिनिधि एक बार फिर से उत्तराखंड के पुनर्निर्माण के यज्ञ में आहुति देने से रह गए। अब इनको करीब जून तक का इंतजार करना पड़ेगा।
सितंबर 2013 में पंचायत चुनाव 16-17 जून को आई आपदा के कारण टल गए थे और अब पुनर्निर्माण के कारण इनका टलना हो रहा है। ऐसे में पंचायतों की न तो आपदा राहत और बचाव कार्य में कोई भूमिका रह पाई और न ही पुनर्निर्माण के काम में उनकी भूमिका दिख रही है।
योजना आयोग ने भी दिया था सुझाव
मुख्यमंत्री हरीश रावत हालांकि विकेंद्रीकृत व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। पुनर्निर्माण के काम को रावत ने परियोजना प्रबंधन इकाइयों के जरिए ब्लॉक तक पहुंचाकर उन्होंने इसका संकेत भी दिया। ऐसे में पंचायतों के स्तर पर पुननिर्माण काम में और ठोस पहल हो सकती थी।
खुद योजना आयोग ने यह कहा भी कि पंचायत और नगर निकायों को मजबूत किया जाए जिससे आपदा से निपटने में ये अपने स्तर पर सक्षम हो सके।
आपदा राहत से काम से बाहर रही पंचायतें
संपर्क मार्गों के निर्माण में पंचायत खास भूमिका अदा कर सकती थी। जनप्रतिनिधि ग्राम स्तर पर आपदा से संबंधित समस्याओं को उठा सकते थे। पर पंचायतों का प्रदेश में सितंबर 2013 में कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद भी गठन नहीं हो पाया। लिहाजा पंचायत आपदा राहत के काम से बाहर ही रहीं।
अब पंचायत चुनाव एक बार फिर टल जाने से जाहिर है कि पंचायतों की भूमिका पुनर्निर्माण में भी न के बराबर ही रहेगी। पंचायतों का जिम्मा अभी तक प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर दिया गया था। अब यह एक बार फिर से तय होना है कि पंचायतों का जिम्मा अधिकारियों को मिलेगा या फिर प्रधानों को ही यह जिम्मा दिया जाएगा।
पंचायतों के उपयोग को कर रहे नजर अंदाज
ऐसे में प्रदेश सरकार भले ही तर्क दे कि पंचायत चुनाव होने से पुनर्निर्माण के काम अटक जाएंगे। पर है इसका ठीक उलटा। पंचायत चुनाव हो जाते तो प्रदेश सरकार को पुनर्निर्माण के काम में और सहूलियत मिल जाती। दूसरी ओर यह भी साफ है कि पंचायत चुनाव को परीक्षा मानकर चल रही सरकार पंचायतों के इस उपयोग को बिलकुल ही नजर अंदाज कर गई।
तो हो जाते मार्च तक चुनाव
अगर निकाय चुनाव के बाद ही जनगणना 2011 के आधार पर परिसीमन और आरक्षण तय कर लिया गया होता तो प्रदेश में मार्च माह में ही चुनाव निपट जाते। रहा पुनर्निर्माण का सवाल तो खुद राज्य निर्वाचन आयोग का कहना था कि आपदा से संबंधित कार्य को विशेष छूट दी जाएगी। लोक सभा चुनाव के लिए भी तो प्रदेश सरकार आचार संहिता में आपदा से संबंधित कार्य में छूट मांग ही रही है।