राजधानी देहरादून का पलटन बाजार बारूदों के ढेर पर हैं। बाजार जिस तरह अव्यवस्थित है, उसमें जरा सी चिंगारी कभी भी शोला बनकर कहर बरपा सकती है।
अरबों का कारोबार करने वाले बाजार में हर अग्निकांड के बाद आग बुझाने के संसाधन सुनिश्चित करने के दावे किए जाते है, लेकिन वक्त के साथ ही तमाम दावों की हवा निकल जाती है। शनिवार को गुरुमीत गारमेंटस में शार्ट सर्किट से लगी आग कई मायने में गंभीर है। गनीमत रही कि आग दिन में लगी।
यदि यही अग्निकांड रात में होता तो बड़ी मुश्किल होती। प्रतिष्ठान खुला होने के कारण समय रहते आग का पता लग गया। वैसे भी पलटन बाजार अग्निकांड के लिहाज से सबसे संवेदनशील है। क्योंकि अनियोजित विकास ने दशा और दिशा बिगाड़ दी है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर तैयार बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में करोड़ों का माल पड़ा है। ऊपर आने जाने के लिए अंदर ही संकरे जीने बनाए गए हैं। आग लगने की स्थिति में फायर कर्मियों को बचाव कार्य करना बेहद मुश्किल भरा होता है। अधिकांश प्रतिष्ठानों की छतों अथवा बीच की मंजिल पर जेनरेटर रखे हुए हैं। इनकी चिंगारी पहले भी कई अग्निकांड का कारण बन चुकी है।
अग्निकांड के दौरान फायर बिग्रेड की गाड़ी को संकरी गलियों तक पहुंचाने की चुनौती किसी से छिपी नहीं है। गंभीर बात यह है कि करोड़ों का कारोबार करने वाले बड़े प्रतिष्ठानों में आग बुझाने के संसाधन तक नहीं है।
फायर बिग्रेड भी फजीहत से बचने के लिए नियमों का पालन कराने से बचता रहा है। एसपी सिटी अजय सिंह का कहना है कि अग्निकांड के मद्देनजर व्यापारियों को जरूरी संसाधन रखने चाहिए, ताकि समय पर उनका सदुपयोग किया जा सके।