उन्हें संस्कृति विभाग, सूचना व जनसंपर्क विभाग, गीत नाट्य अकादमी भारत सरकार, उत्तराखंड शाखाव सीसीआरटी दिल्ली में लोक संस्कृति विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया गया। वह संगीत और नारी के लिए समाज की रूढ़िवादी परंपरा का सकारात्मक खंडन कर प्रेरणास्त्रोत बनीं। सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने महिलाओं, बच्चों और युवाओं को संगीत का निशुल्क प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने देश-विदेश के सरकारी और सोशल मीडिया में सतर्कता संदेशों के साथ वेबीनार में लोक संस्कृति का व्यावहारिक प्रशिक्षण व संवर्द्धन किया। इसके अलावा 2016 में उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार, 2016 राष्ट्रपति सम्मान, 2014 में उत्तराखंड रत्न, 2018 में उत्तराखंड भूषण, स्व. मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला सम्मान से सम्मानित किया गया।
लॉकडाउन के दौरान लिखी पांच किताबें
डा. माधुरी बड़थ्वाल ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान पांच किताबें लिखी। इन किताबों को लिखने का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को नृत्य, गायन और वादन सिखाना था। उन्होंने गढ़वाल के नृत्य प्रधान लोकगीत थड़िया, चौफुला, ऋतु प्रधान और संस्कार लोक गीत को पुस्तकों में लिपिबद्ध किया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को भी किताबों में लिपिबद्ध किया है। उन्होंने पारंपरिक लोक कलाओं, गीतों, नृत्य और वादन का किताबों के माध्यम से दस्तावेजीकरण किया। इसके अलावा उन्होंने वैज्ञानिक आधार पर शोध ग्रंथ गढ़वाली लोकगीतों में राग-रागनियां और गढ़वाल की लोकगाथाएं व मुहावरे की किताब भी लिखी है।