प्राइवेट स्कूलों की बसों में बच्चों की जान किस कदर खतरे में है, इसका नजारा शुक्रवार को उस समय देखने को मिला, जब जेएम नितिका खंडेलवाल ने स्कूलों में बस पहुंचते ही छापेमारी शुरू कर दी।
जेएम ने पाया कि बसों में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। यह देखकर जेएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद एआरटीओ को कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि दो स्कूलों में हुई कार्रवाई के दौरान नौ स्कूली वाहनों का चालन कर दिया गया, जबकि दो को सीज कर दिया गया है। इस मामले में लापरवाही की पड़ताल पूरी होने के बाद स्कूल संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने के भी आदेश दिए गए हैं।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट (जेएम) नितिका खंडेलवाल शुक्रवार साढ़े सात बजे पिरान कलियर स्थित शेफील्ड स्कूल के समीप पहुंची। इस दौरान उन्होंने स्कूल पहुंच रहीं बसों को रोक कर जांच करनी शुरू कर दी। जेएम ने बताया कि एक बस में 40 सीटें थी, लेकिन उसमें 72 बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। इसके अलावा दो टाटा मैजिक वाहनों में भी यहीं हाल था। आठ सीट वाली टाटा मैजिक में 23 बच्चे बैठाए गए थे। उन्होंने बताया कि मौके पर मौजूद एआरटीओ (प्रशासन) शैलेश तिवारी की ओर से छह बसों का चालान किया गया है, जबकि दो वाहन सीज कर दिए गए हैं। जेएम ने बताया कि जांच पड़ताल पूरी होने के बाद स्कूल के ट्रांसपोर्ट हैड के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
इसके बाद जेएम ने आदर्शनगर स्थित ग्रीनवे पब्लिक स्कूल में कार्रवाई करते हुए तीन बसों का चालान करने आदेश दिए। कार्रवाई के दौरान जब जेएम दिल्ली-हरिद्वार हाईवे स्थित लिटिल स्कालर्स एकेडमी की ओर रुख किया उन्होंने सामने से आ रही प्राइवेट वैन को पकड़ लिया। इसमें भी बच्चों को बेतरतीब ढंग से भरा गया था, लेकिन जेएम को देखते ही चालक वैन छोड़कर भाग खड़ा हुआ। जेएम ने बताया कि वैन संचालक की जानकारी ली जा रही है। जल्द ही इस पर भी कार्रवाई होगी।
जेएम ने बताया कि स्कूली बसों की सुरक्षा को लेकर पिछले काफी समय से शिकायतें मिल रहीं थीं। विगत बृहस्पतिवार को भी बसों के बाबत कुछ लोग शिकायत लेकर दफ्तर पहुुंचे थे। इसके बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि इस तरह का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
मैडम! हमें बड़े बच्चों की गोद में बिठाया जाता है
ज्वाइंट मजिस्टे्ट ने बसों में बैठे मिले बच्चों से बात की। बच्चों ने जेएम को बताया कि उन्हें बड़े बच्चों की गोद में बैठकर स्कूल आना पड़ रहा है। बच्चों ने शिकायत की, कि इस बाबत मम्मी-पापा और स्कूल को भी शिकायत की गई, लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता है। जेएम ने बताया कि जिस बस में 72 बच्चे बैठे हुए थे, वह बस करीब बारह किलोमीटर की दूरी तय कर कृष्णानगर क्षेत्र से स्कूल पहुंची थी। ग्रर्मी के कारण भी बच्चों को बेहद परेशानी हो रही थी।
परिवहन विभाग की लापरवाही भी उजागर
शहर में किसी ज्वाइंट मजिस्टे्ट की ओर से इस तरह की कार्रवाई पहली बार देखने को मिली है, लेकिन पहली बार में मिली भारी अनियमितताओं के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर परिवहन विभाग की ओर से इस तरह की कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
मानकों की अनदेखी कई बार पड़ चुकी है भारी
स्कूली वाहनों में मानकों की अनदेखी बच्चों पर कई बार भारी पड़ चुकी है। करीब एक वर्ष पूर्व खानपुर क्षेत्र में बच्चों से भारी खटारा बस के ब्रेक फेल हो गए थे। इसके चलते बस सड़क किनारे गड्ढों में पलट गई थी। इसमें कई बच्चें चोटिल हुए थे। करीब चार माह पूर्व भगवानपुर क्षेत्र के सरठेडी गांव के समीप स्कूल की छुट्टी के बाद यहां से गुजर रही एक बस सड़क किनारे गहरे गड्ढों में पलट गई थी। हालांकि एक पेड़ के सहारे अटकने से बड़ा हादसा टल गया था, लेकिन फिर भी चार बच्चों को चोट आई थी। तीन दिन पूर्व मंगलौर क्षेत्र एक प्राइवेट स्कूल की वैन अचानक अनियंत्रित होकर कच्ची पटरी पर पलट गई थी। हालांकि इसमें बच्चों के न होने के चलते हादसा टल गया था। करीब दो साल पूर्व पिरान कलियर क्षेत्र के माजरी गांव के समीप एक स्कूली बस के बे्रेक फेल हो गए थे और बस सड़क किनारे पेड़ से टकराने के बाद पलट गई थी। इसमें आधा दर्जन बच्चों को चोट आईं थीं। करीब डेढ़ साल पहले मंगलौर से आ रही गैस किट लगी एक वैन में गैस का रिसाव हो गया था। इससे करीब दस बच्चे बेहोश हो गए थे।