बाड़वाला-जुड्डो मोटर मार्ग पर हादसे वाली जगह पर यदि क्रश बैरियर और पैराफिट बने होते तो शायद पिकअप वाहन खाई में गिरने से बच जाता और इतने लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती। जौनसार बावर क्षेत्र में 40 से अधिक सड़कें ऐसी हैं जिन पर क्रश बैरियर और पैराफिट नहीं हैं। इसके बावजूद प्रशासन सड़कों पर क्रश बैरियर और पैराफिट निर्माण की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
मार्ग पर क्रश बैरियर और पैराफिट नहीं होने के कारण लोगों को सड़क पर हरदम जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। हर बार क्षेत्र में कोई हादसा होने के बाद विभागीय अधिकारी शीघ्र ही सड़क पर सुरक्षा की दृष्टि से पैराफिट और क्रश बैरियर निर्माण की बात करते हैं, लेकिन मामले के पुराना होते ही सुरक्षा इंतजामों की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। स्थानीय अधिवक्ता क्षमा शर्मा, धनंजय भट्ट, जेपी उनियाल आदि का कहना है कि कालसी-चकराता, हरिपुर-कोटी-मीनस, दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी मुख्य सड़कों पर भी कई-कई किमी तक पैराफिट और क्रश वॉल नहीं हैं। कई मामलों में यह क्रश वॉल और पैराफिट हादसों को कुछ हद तक रोकने में कामयाब होते हैं।
वहीं, लोनिवि के मुख्य अभियंता हरिओम शर्मा ने बताया कि क्षेत्र की कई सड़कों पर पैराफिट और क्रश बैरियर लगाने का काम जारी है। जल्द ही सभी सड़कों पर सुरक्षा इंतजामों को पूरा किया जाएगा।
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इन सड़कों पर नहीं पैराफिट और क्रश बैरियर
साहिया-क्वानू, साहिया-समाल्टा-पानुवा, साहिया-माख्टी मोटर मार्ग, साहिया-उत्पाल्टा मोटर मार्ग, हईया-अलसी-पंजिया, कोठा बैंड-ऊभरेऊ कोठा बैंड-चंदऊ-किशोऊ, फेडूलानी-आरा अस्टी, फेडूलानी-दुनवा-मलेथा, साहिया-मलेथा-दातनू, शंभू की चौकी-दधोऊ-बनसार, समरजैंस मोटर मार्ग समेत 40 से अधिक सड़कें ऐसी हैं जहां पर सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी क्रश वॉल और पैराफिट नहीं है।