राज्य आंदोलकारियों के आश्रितों को आउट सोर्सिंग से होने वाली भर्ती में दस फीसदी का आरक्षण देने का फैसला सरकार ने लागू कर दिया है।
जबकि सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए विधानसभा में एक्ट लाया जाएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह जानकारी शनिवार को राज्य आंदोलनकारियों के एक प्रतिनिधि मंडल को दी।
सरकार की मंशा स्पष्ट
सीएम चंदर रोड स्थित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे जहां उनके काफिले को रोककर उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मंच से जुड़े आंदोलनकारी अपनी बात कहना चाहते थे। सीएम कार्यक्रम स्थल से पैदल चलकर उनके पास पहुंचे और उनकी मांगों पर सरकार की मंशा स्पष्ट की।
सीएम ने स्पष्ट किया कि राज्य आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानियों या फिर उस जैसा कोई दर्जा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोई आपको गुमराह कर रहा है।
स्वतंत्रता सेनानी घोषित करने का अधिकार केंद्र सरकार का है। राज्य सरकार अपनी मांगों के लिए प्रतिबद्ध है। सभी को पेंशन देना मुश्किलों भरा है क्योंकि राज्य आंदोलनकारियों की सूची बढ़कर एक लाख हो जाएगी।
दस हजार से अधिक लोग नहीं
ऐसे में संसाधन और प्रदेश के लोगों से पूछकर ही फैसला लिया जा सकता है। इस पर आंदोलनकारियों ने कहा दस हजार से अधिक लोग नहीं होंगे। सीएम ने कहा कि अभी साठ से ऊपर के लोगों को पेंशन पर फैसला लिया है। अगर चिंहित कर संख्या सीमित रहती है और एक मान्य सूची आपकी ओर से पेश की जाती है तो सरकार इसके लिए भी तैयार है।
इस मौके पर आंदोलनकारियों की ओर से नंदावल्लभ पांडेय, सुधा नेगी, पुष्पा रावत, वीना भट्ट, वीशम्बरी रावत आदि मौजूद थीं। सीएम के साथ मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार, राजीव जैन और सतबीर सिंह रावत आदि मौजूद थे।