उत्तराखंड राज्य बने 14 साल हो गए पर अभी भी यहां होने वाले अधिकांश निर्माण दूसरे राज्यों की एजेंसियां ही करती रही हैं। लेकिन अब राज्य सरकार बाहरी एजेंसियों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी में है।
औद्योगिक क्षेत्र (सिडकुल) और अन्य जगह राज्य की एजेंसियों की अनदेखी कर यूपीआरएनएन को काम दिए जाने को लेकर अमर उजाला ने अपने अभियान के जरिए राज्य सरकार का ध्यान खींचा था।
बाहरी निर्माण एजेंसियों के दबदबे और मनमानी को समाप्त करने के लिए सरकार अब अपनी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट/कंस्ट्रक्शन यूनिट (पीएमएनयू) बनाएगी।
बाहरी निर्माण एजेंसियों के हाथों सड़कों व तमाम बड़े निर्माण कार्यों को सौंपने पर उठे सवालों के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। प्रस्तावित यूनिट बनने के बाद राज्य की अन्य निर्माण एजेंसियों को इसके अधीन लाया जाएगा।
बाहरी एजेंसियों के निर्माण की गुणवत्ता भी परखी जाएगी। एजेंसियों को काम में तेजी लाने का अल्टीमेटम भी दिया गया है।
वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने विधानसभा में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारियां देते हुए बताया कि बाहरी एजेंसियों के कामकाज में जिस तरह से ढिलाई बरती जा रही है, उससे हम अपनी निर्माण एजेंसी खड़ी कर निपट सकते हैं। यूनिट में राजकीय सेवाओं के अलावा अन्य बड़ी निर्माण एजेंसियों से विशेषज्ञों और इंजीनियरों की तैनाती होगी।
फिलहाल बनी रहेंगी पुरानी निर्माण एजेंसियां
इंदिरा हृदयेश ने कहा कि राज्य की अन्य निर्माण एजेंसियां फिलहाल समाप्त नहीं की जा रही है, उनको इस नई यूनिट के साथ किस तरह जोड़ा जाएगा, इसका खाका तैयार किया जा रहा है। कैबिनेट में प्रस्ताव लाने के चार पांच माह के भीतर यूनिट गठित हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि बाहरी एजेंसियों विशेषतौर पर यूपीआरएनएन (उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम), नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड के कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा किए जाने की समीक्षा की गई है।
इन सभी एजेंसियों के निर्माण कार्य में ढिलाई बरतने और समय पर काम पूरा नहीं करने के मामले सामने आएं है, जिसके बाद उन्हें चेतावनी जारी की गई है। निर्माण एजेंसियों को यह भी साफ कर दिया गया है कि उनको आवंटित कार्य समय रहते पूरे किए जाएं।
काम के लिए आवंटित धनराशि को स्थानीय बैंकों में खाता खुलवाकर रख दिया जाए और जिन शर्तों पर निर्माण कार्य दिया है उसकी शर्तों, पद्वति में बदलाव नहीं लाया जाए।
राज्य की अपनी तीन बड़ी निर्माण एजेंसियों उत्तराखंड समाज कल्याण निगम, पेयजल निगम और अवस्थापना विकास निगम के अधिकारियों के साथ भी इस मसले पर बैठक की गई।
बाहरी एजेंसियों के लिए भी खुलें रहेंगे दरवाजे
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) के गठन के बाद भी बाहरी के लिए रास्ता खुला रहेगा। अगर यूनिट किसी निर्माण कार्य को करने में असमर्थता जताती है तो टेंडर प्रक्रिया में बाहरी एजेंसी को मौका दिया जा सकेगा। अभी भी सरकार अपनी निर्माण एजेंसियों के साधन संपन्न नहीं होने को आधार बनाकर यूपीआरएनएन को काम आवंटित करता है।
अब सरकार यह दावा कर रही है कि उनकी यूनिट इनती सक्षम होगी कि बाहरी एजेंसियों की जरूरत नहीं रहेगी, लेकिन मौजूदा निर्माण एजेंसियों का हाल देखकर आने वाले कुछ वर्षों तक बाहरी एजेंसियों की हिस्सेदारी रहने की पूरी संभावना है।
बाहरी एजेंसियों के पास 10 हजार करोड़ के काम
राज्य में इस समय लगभग 10 हजार करोड़ के निर्माण कार्य बाहर की तीन निर्माण एजेंसियों को पास हैं। ये एजेंसियां हैं-उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्र्क्शन कोर्पोरेशन और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड। आवंटित कुल निर्माण कार्य में 60 फीसदी यूपीआरएनएन के पास है। इसके काम की गुणवत्ता पर सबसे ज्यादा सवाल खड़े हो रहे हैं।
एनबीसीसी ही दोबारा बनाएगी पुल
उत्तरकाशी में निर्माणाधीन पुल के ढह जाने के मामले में निर्माण एजेंसी एनबीसीसी ने अपनी पक्ष रख दिया है। एजेंसी ने पुल निर्माण के दौरान हुई तकनीकी गड़बड़ी को माना है, लेकिन एजेंसी अब दोबारा पुल का निर्माण करेगी। एनबीसीसी ने अपनी रिपोर्ट शासन को दे दी है।