एक सीजन में चार में से तीसरी पूर्णिमा के आधार पर ब्लू मून 18 मई 2019 को दिखा था और अगला तीन वर्ष बाद 19 अगस्त 2024 को पड़ेगा। जून 2021 में संक्रांति 21 जून को, जबकि पूर्णिमा 24 जून और 24 जुलाई को थी। अब 22 अगस्त और 20 सितंबर को पूर्णिमा है।
संक्रांति 22 सितंबर को है। इस तरह इस बार संक्रांति से दो दिन पूर्व चौथी पूर्णिमा है। खास बात यह है कि ये दोनों प्रकार के ब्लू मून अमूमन अलग-अलग वर्षों में ही पड़ते हैं। अगली बार वर्ष 2048 में यह घटना होगी, जब 31 जनवरी को मासिक आधार पर और 23 अगस्त को सीजनल आधार पर ब्लू मून की घटना होगी। एक वर्ष में दो ब्लू मून की घटना बेहद दुर्लभ है और अमूमन एक शताब्दी में चार बार ही होती है।
कहां से आया शब्द जबकि नीला होता नहीं मून
अंग्रेजी की कहावत वन्स इन अ ब्लू मून का अर्थ दुर्लभ घटना होती है। हालांकि न तो चांद कभी नीला होता है और न ही ब्लू मून की घटना बहुत दुर्लभ होती है। तो ये कहावत कहां से प्रचलित हुई? जानकारों का मानना है कि अंग्रेजी के बेल्व यानी बिट्रे शब्द से इसका संबंध हो सकता है। बिट्रे यानी जो स्थापित विश्वास से अलग हो। प्रति माह एक या प्रति सीजन तीन पूर्णिमा स्थापित परंपरा है और अतिरिक्त पूर्णिमा इससे हटकर। संभवत: बेल्व शब्द बाद में ब्लू हो गया होगा।