सिफारिश
1. सीएम स्वरोजगार योजना और मनरेगा का मिल रहा है फायदा।
2. राज्य और जिला स्तर पर रिवर्स पलायन करने वालों के आर्थिक पुनर्वास को प्रकोष्ठ गठन किया जाए।
3. रिवर्स पलायन के लिए डेटा बेस तैयार किया जाए।
4. कृषि, उद्यान, पशुपालन विभाग लौटे लोगों से संपर्क स्थापित किया जाए।
5. मनरेगा के स्कोप का विस्तार किया जाए ।
6. स्वरोजगार में लगे लोगों को सहायता दी जाए। करीब 12 प्रतिशत लोग इससे जुड़े हैं।
7. कौशल विकास किया जाए। लौटने वाले कई लोग आतिथ्य क्षेत्र से हैं और प्रशिक्षित हैं। ये अब कृषि, बागवानी , मनरेगा सेब जुड़े हैं।
आयोग की यह रिपोर्ट रिवर्स माइग्रेशन के मोर्चे पर भी राहत देने वाली है। खास बात यह है कि वापस लौटे लोगों में से अधिकतर अपने मूल स्थान या फिर आसपास के क्षेत्र में ही गए हैं। आयोग की ओर से अब प्रवासियों से संवाद बनाए रखने की सिफारिश प्रमुख रूप से की गई है। - एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड पलायन आयोग
सीएम ने विभागीय सचिवों को सौंपी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के युवाओं के साथ ही कोविड-19 महामारी के कारण राज्य में लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभागीय सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इस कार्यक्रम को मिशन मोड में संचालित करने के भी निर्देश दिए हैं।
हमारा उद्देश्य राज्य के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभागवार रोजगार परक योजनाओं को चिह्नित करने के साथ ही आपसी समन्वय के साथ कार्य योजना तैयार की जाएगी। -त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
दो एमओयू हुए, स्वयं सहायता समूहों को फायदा
उत्तराखंड कौशल विकास मिशन व ग्राम्य विकास विभाग (उत्तराखंड राज्य आजीविका मिशन) के बीच एमओयू हुआ। इसके तहत ग्राम्य विकास विभाग के स्वयं सहायता समूहों को रूरल सेल्फ इंप्लायमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।
एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत राज्य का ब्रांड विकसित किए जाने की भी योजना है। इसी तरह उत्तराखंड कौशल विकास मिशन, तकनीकी शिक्षा एवं नेसकॉम के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू हुआ। इसमें तकनीकी शिक्षा विभाग के छात्र-छात्राओं को फ्यूचर स्किल्स, हाई एंड स्किल्स में प्रशिक्षित कर रोजगार व स्वरोजगार के अवसरों से जोड़े जाने की योजना है।