शासन के एक शासनादेश ने श्रीनगर के राजकीय मेडिकल कॉलेज के करीब 300 कर्मचारियों की रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है। यदि यह शासनादेश वापस नहीं लिया जाता है तो इन लोगों की नौकरी जानी तय है। ऐसे में कॉलेज में एक बार फिर से कर्मचारियों का आंदोलन खड़ा हो सकता है।
शासनादेश में मेडिकल कॉलेज में सृजित पद के विरुद्ध नियुक्त कर्मियों की संविदा तत्काल समाप्त करने का आदेश दिया गया है।
कर रहे थे नियमितीकरण का आंदोलन
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान में संविदा, नियत और दैनिक वेतन पर कार्यरत करीब 475 कर्मचारियों ने अक्तूबर 2013 में नियमितीकरण की मांग के लिए आंदोलन किया था।
475 कर्मियों में से करीब 300 ऐसे कर्मी भी शामिल हैं जो नियत वेतन, दैनिक वेतनकर्मी हैं। इन कर्मचारियों को एमसीआई की जरूरतों को पूरा करने के लिए बिना पद स्वीकृत किए नियुक्त किया गया था।
कर्मियों का है कहना
बीते चार वर्षों से कार्य कर रहे इन कर्मियों का कहना है कि यदि उनकी नियुक्ति गलत थी, तो आंदोलन करने पर ही सरकार को कैसे याद आई। शासन से मिली धनराशि से ही इतने वर्षों से उनका वेतन निकलता रहा है।
चिकित्सा मंत्री का वादा अधूरा
पिछले साल कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान यहां पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत ने उपनल के पदों के अनुरूप वेतन देने का वायदा किया था।
इसके साथ ही एमसीआई निरीक्षणों के लिए जरूरत की सामग्री तैयार करने में महत्वपूर्ण रहे कर्मियों के लिए पद सृजन की कार्रवाई का भी आश्वासन दिया था। लेकिन इसके उलट पिछले महीने चिकित्सा शिक्षा सचिव मनीषा पंवार की ओर से नियत व दैनिक कर्मियों को निकाले जाने का शासनादेश जारी कर दिया गया है।
इनका है कहना
इस संदर्भ में डेढ़ वर्ष पूर्व मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी के पद पर रहते हुए मैंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी थी। अब प्राचार्य को दिए गए शासनादेश पर शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।
-डा.आरपी भट्ट, निदेशक चिकित्सा शिक्षा विभाग