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इस गांव में केवल एक ही बीए पास

Tue, 29 Oct 2013 05:42 PM IST
रविंद्र थलवाल/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
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उत्तराखंड सरकार भले हर बच्चे को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का दावा कर रही हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। उत्तरकाशी से सटे पिलंग गांव की कहानी तो कुछ ऐसी है।
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इस गांव में केवल एक ही ऐसा व्यक्ति है जिसने स्नातक की परीक्षा पास की है। मुख्य सड़क से 18 किलोमीटर दूर भटवाड़ी प्रखंड के पिलंग गांव में बेसिक और जूनियर हाईस्कूल है। नवीं की पढ़ाई के लिए बच्चों को 18 किलोमीटर पैदल चलकर मल्ला तथा इंटर के लिए 21 किमी दूर भटवाड़ी आना पड़ता है।

जबकि इसके बाद की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय उत्तरकाशी आना पड़ता है। ऐसे में अधिकतर छात्र-छात्राएं आठवीं के बाद ही पढ़ाई छोड़ने को विवश हैं। बालिकाओं को अभिभावक इतनी दूर भेजने में ही कतराते हैं।
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अतर सिंह इकलौते स्नातक
यही कारण है कि इस गांव में अभी तक सिर्फ अतर सिंह (उम्र 25 साल) ने ही उत्तरकाशी पीजी कालेज से वर्ष 2012 में बीए तक की पढ़ाई पूरी की है। अब अतर सिंह बीएड कर रहे हैं। उनके माता-पिता खेती करते हैं। 97 परिवार और 450 आबादी वाले इस गांव के 12 युवक और तीन युवतियां ही इंटरमीडिएट उत्तीर्ण हैं। ओबीसी का दर्जा मिलने से पूरी गंगा घाटी में हर्ष की लहर है, लेकिन पिलंग गांव के ग्रामीणों का मानना है कि आरक्षण का लाभ तो तब मिलेगा जब शिक्षित हो पाएंगे।

गांव के जूनियर हाईस्कूल में 63 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। यहां स्वीकृत पांच पदों के सापेक्ष सिर्फ दो शिक्षक ही तैनात हैं। कई बार रिक्त पदों को भरने की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
-बचन सिंह राणा, पूर्व प्रधान पिलंग गांव

गांव में जूनियर हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है और आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को बाहर भेजने की स्थिति नहीं है। इस वजह से गांव के लोग शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं। सरकार गांव के स्कूल को उच्चीकृत करे और गांव तक सड़क पहुंचाए तो स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है। -केदार सिंह, सुरेंद्र सिंह, चतर सिंह, निवासी पिलंग गांव

पिलंग गांव के जूनियर हाईस्कूल के उच्चीकरण का प्रस्ताव रमसा में दिया गया था। छात्र संख्या कम होने पर यह प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया। अब इसे राज्य सेक्टर से उच्चीकृत किया जा सकता है।
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-एसपी सेमवाल, अपर जिला शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी
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