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Exclusive: ऑनलाइन का जमाना...पर पढ़ने के लिए किताबे ही पहली पसंद, इस विश्वविद्यालय में ऑफलाइन पढ़ाई बहुत आगे

Sun, 04 Aug 2024 10:11 AM IST
हीरा मेहरा अंकित गर्ग, संवाद

सार

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में छात्रों के पास पढ़ने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम होते हैं। जनवरी सत्र में इस माध्यम में 2344 छात्रों ने प्रवेश लिया। जबकि, ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत 108 प्रवेश हुए।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock
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विस्तार
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भले ही जमाना ऑनलाइन का हो, लेकिन जब बात अखबार या किताब पढ़ने की हो तो मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन के बजाय उसे सामने रखकर पढ़ने में ही आनंद आता है। हां, यह बात अलग है कि मन चाही सामग्री उपलब्ध नहीं होने पर ऑनलाइन का सहारा लेना पड़ता है। यह बात व्यवहारिक तौर पर तो सभी मानते हैं, लेकिन प्रयोग के रूप में दूरस्थ शिक्षा में दिए गए ऑनलाइन और ऑफलाइन के विकल्प के आंकड़ों में भी इसकी पुष्टि हो रही है।

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आंकड़ों के अनुसार जनवरी सत्र में 83 प्रतिशत ने पढ़ने के लिए किताबों का विकल्प चुना। जबकि, महज 17 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं, जो साफ्ट कॉपी के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की ओर से दूरस्थ शिक्षा के अंतर्गत साल में जनवरी और जुलाई में प्रवेश लिए जाते हैं। जुलाई में प्रवेश लेने वालों की संख्या जनवरी में प्रवेश लेने वाले छात्रों से करीब तीन गुना ज्यादा होती है। विवि में प्रवेश लेने वाले छात्रों के पास पढ़ने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम होते हैं। ऑफलाइन माध्यम के अंतर्गत छात्रों को ओडीएल (ओपन डिस्टेंस लर्निंग) के तहत अध्ययन केंद्र का आवंटन होता है। इसमें छात्रों के प्रैक्टिकल एवं असाइनमेंट आदि जमा होते हैं। जनवरी सत्र में इस माध्यम में 2344 छात्रों ने प्रवेश लिया।

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जबकि, ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत 108 प्रवेश हुए। इस तरह से ऑफलाइन माध्यम में 96 प्रतिशत एवं ऑनलाइन माध्यम में 4 प्रतिशत छात्रों ने प्रवेश लिया। वहीं, दूसरी ओर ऑफलाइन माध्यम में भी दो तरह के विकल्प होते हैं। पहला किताबों से पढ़ाई और दूसरा ऑनलाइन साफ्ट कॉपी से पढ़ाई करने का। इसमें भी 2038 छात्रों ने किताबों का चयन किया, जबकि महज 414 छात्रों ने साफ्ट कॉपी से लि पाठ्य सामग्री का विकल्प चुना है। इससे साफ है कि पढ़ने के मामले में अधिकांश लोग पठन सामग्री को सामने रखकर ही पढ़ना पसंद करते हैं। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनिल कुमार डिमरी ने बताया कि ऑफलाइन माध्यम में प्रवेश लेने वालों की काफी ज्यादा है। छात्र किताबों से ही पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। 
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फीस में छूट न हो तो कोई भी नहीं पढ़ेगा ऑनलाइन
दरअसल, पर्यावरण की दृष्टि और कीमत घटाने के लिहाज से छात्रों को ऑनलाइन मोड में पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसी के चलते इग्नू ने सॉफ्ट कॉपी से पढ़ाई करने वाले छात्रों को फीस में 15 प्रतिशत की छूट दी है। बावजूद इसके सॉफ्ट कॉपी से पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कम है। ऐसे में माना जाता है कि फीस में छूट न हो तो सभी छात्र किताबों से ही पढ़ाई करेंगे। बता दें कि इग्नू के ऑनलाइन पोर्टल पर भी सभी पठन सामग्री उपलब्ध होती है, जिसका लाभ कोई भी छात्र ले सकता है।

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