अगर आप अपने डेबिट कार्ड से शॉपिंग करने जाएं तो हो सकता है कि एक हजार रुपये के बिल पर आपको 2.50 रुपये अधिक अदा करने पड़ें। दरअसल,दुकानदार मर्चेंट डिस्काउंट रेट(एमडीआर) चार्ज सीधे ग्राहकों से वसूल रहे हैं जबकि कई जगहों पर खुद मर्चेंट ही इसे वहन कर रहे हैं। कुल मिलाकर ग्राहक परेशान हैं और बैंकों के कई अधिकारी भी साफ दिशा-निर्देश न होने की वजह से असमंजस में हैं।
एक जनवरी से नए नियम लागू
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
- फोटो : SBI
नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने डेबिट कार्ड पर ट्रांजेक्शन चार्ज 31 दिसंबर 2016 तक बंद कर दिया था। एक जनवरी से यह नियम हटा दिया गया। इसके साथ ही व्यापारियों ने अपने हिसाब से वसूली शुरू कर दी। नियम के हिसाब से एमडीआर चार्ज खुद मर्चेंट को ही वहन करना चाहिए।
यह चार्ज बैंकों में अलग-अलग हैं। आमतौर पर एक हजार रुपये तक डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन पर 0.25 प्रतिशत यानी 2.50 रुपये चार्ज है। लेकिन शहर में अलग-अलग मर्चेंट ने इस चार्ज को लेकर अलग-अलग नियम लागू किए हुए हैं।
कई मर्चेंट तो ऐसे हैं जो कि इस चार्ज को खुद वहन कर रहे हैं और कई मर्चेंट ग्राहक से इसकी वसूली कर रहे हैं। बैंक अधिकारी भी इस चार्ज को लेकर सही दिशा निर्देश के इंतजार में हैं। पीएनबी के अधिकारी एस कुमार ने बताया कि एमडीआर चार्ज आमतौर पर मर्चेंट ही वहन करते हैं लेकिन कई मर्चेंट ने नोटबंदी के बाद से ग्राहकों से यह पैसा लेना शुरू कर दिया है। हालांकि यह वसूली सही है या नहीं, इसे लेकर अभी तक आरबीआई से साफ निर्देश नहीं मिले हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा के एक अधिकारी ने बताया कि केवल वही मर्चेंट ग्राहक से डेबिट कार्ड पेमेंट का पैसा वसूल रहे हैं, जिन्हें बिक्री में अपेक्षाकृत कम मुनाफा मिलता है। आमतौर पर मर्चेंट को यह खुद ही वहन करना चाहिए।
जानिए, क्या होता है एमडीआर
ऑनलाइन शॉपिंग
- फोटो : Market Land
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट। दरअसल, बैंक की प्वाइंट ऑफ सेल(पीओएस) मशीन इस्तेमाल करने पर बैंक यह यह चार्ज मर्चेंट से लेता है।