करोड़ों की जीएसटी चोरी का अनुमान
इस मामले में जीएसटी की चोरी भी हो रही है। इसका आंकलन अभी तक नहीं है कि अब तक कितने की चोरी की गई है। उसे समझने के लिए मान लें कि किसी को कार, ट्रक अन्य किसी बड़े वाहन का बीमा कराना है। उसके बीमे का प्रीमियम मान लो कि 20 हजार रुपये होता है तो इस पर 18 फीसदी के हिसाब से 3600 रुपये जीएसटी सरकार को देना होता है। लेकिन, मोटरसाइकिल का तो बीमा प्रीमियम तकरीबन 500 से दो हजार रुपये तक ही आता है। ऐसे में सरकार को जीएसटी केवल 90 रुपये से लेकर 360 रुपये तक ही दिया जाता है। इस हिसाब से कई सालों में यह आंकड़ा करोड़ों रुपये का हो सकता है।
दरअसल, किसी भी वाहन को ट्रांसफर कराने, वाहन की एनओसी लेने या फिटनेस कराने पर बीमा होना जरूरी होता है। चूंकि, कई बार वाहन पुराना होता है। यही नहीं कुछ लोग इसे केवल खानापूर्ति ही मानते हैं। ऐसे समय में लोगों की मर्जी से ही इस काम को अंजाम दिया जाता है। इन कामों के लिए बीमा की स्थिति ऑनलाइन ही देखी जाती है। आरटीओ में भी जब चेक किया जाता है तो वाहन बीमित ही दिखाई देता है। इसे भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय के पोर्टल पर देखा जाए तो यह इंश्योर्ड ही दिखाई देता है।