पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 13 मई 2020 को होप यानी हेल्पिंग आउट पीपुल एवरीव्हेयर की शुरुआत की। इसका मकसद था कि प्रवासियों को उनकी स्किल के हिसाब से रोजगार मुहैया हो। कुछ ही महीनों में करीब 60 हजार प्रवासियों ने रोजगार की जरूरत के तहत इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया। सरकार की ओर से अभी भी होप पोर्टल के माध्यम से प्रवासियों को रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
मनरेगा के तहत बढ़ी काम की मांग
लॉकडाउन के बाद राज्य में मनरेगा कार्य की मांग बढ़ी। जुलाई 2019 में जहां 90,623 परिवारों ने मनरेगा का काम मांगा था, वहीं 2020 जुलाई में लगभग ढाई गुणा अधिक 2,40,221 परिवारों ने मनरेगा का काम मांगा। इससे पहले अप्रैल में 74,951 परिवारों ने मनरेगा के काम की मांग की थी, जबकि मई में 1,95,182 परिवारों ने काम मांगा तो जून में 2,24,510 परिवारों ने काम मांगा था। 2019-20 में अप्रैल माह में काम मांगने वाले परिवारों की संख्या 1,27,912, मई में 99,651 व जून में 82,107 थी। कोरोना महामारी के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ी।
सरकार ने राशन कार्ड के बिना भी दिया राशन
राज्य सरकार ने प्रवासियों को राशन के मामले में भी बड़ी राहत दी। राशन में गुलाबी या पीले कार्ड की अनिवार्यता को खत्म करते हुए सरकार ने आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत प्रवासियों को राशन दिया। राशन में उन्हें पांच किलो गेहूं और एक किलो दाल निशुल्क दी गई। कई महीने तक यह सिलसिला चलता रहा, जिससे प्रवासियों को राहत मिली।
अभिनव प्रयोग कर प्रवासी हुए आत्मनिर्भर
जिन प्रवासियों को घर लौटने के बाद रोजगार नहीं मिल पाया, उन्होंने अपने अभिनव प्रयोग से अपने काम शुरू किए। दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में रेस्टोरेंट में काम करने वाले प्रवासियों ने पहाड़ में ही छोटे-छोटे रेस्त्रां खोलकर रोजगार की राह बनाई। पौड़ी के युवाओं ने हेयर सैलून खोला, जिसमें कई लोगों को रोजगार भी दिया और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बना। इसके अलावा बुरांश का जूस, मशरूम जैसे उत्पादन से भी प्रवासियों के लिए रोजगार की राह खुली।