समान रैंक पर समान पेंशन का हक पाने के लिए पूर्व सैनिकों की 30 वर्षों से चली आ रही लड़ाई केंद्र के बजट प्रावधान से जीत में तब्दील होती दिख रही है।
वन रैंक वन पेंशन की घोषणा यूपीए सरकार ने अंतरिम बजट में कर 1 अप्रैल से लागू करने की घोषणा की थी, जिसे पूरा नहीं किया गया।
लोकसभा चुनाव में भाजपा के घोषणा पत्र में वन रैंक वन पेंशन का प्रावधान था, जिसे एनडीए सरकार ने पहले बजट में लागू करने का फैसला लिया है।
डेढ़ लाख पूर्व सैनिकों को मिलेगा लाभ
उत्तराखंड में लगभग डेढ़ लाख पूर्व सैनिकों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि इसे लागू की व्यवस्था रक्षा मंत्रालय से आदेश जारी होने बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
वन रैंक वन पेंशन के लिए केंद्र ने बजट में एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि अंतरिम बजट में पांच सौ करोड़ का प्रावधान पहले से है।
सरकार पर वन रैंक वन पेंशन लागू करने के लिए लगभग 1700 करोड़ रुपये का आर्थिक भार पड़ेगा। केंद्र इसके लिए एक अप्रैल से ही लागू करेगी। पूर्व सैनिकों ने एनडीए सरकार के फैसले का स्वागत किया है।
पूर्व सैनिक लीग में बंधी उम्मीद
पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष ब्रिगेडियर केजी बहल ने बताया कि वन रैंक वन पेंशन का बजट प्रावधान पूर्व सैनिकों के हितों में लिया गया फैसला है, लेकिन इसे लागू करने के लिए सरकार क्या प्रक्रिया अपनाएगी अब इसका इंतजार है।
उन्होंने बताया कि लीग ने प्रधानमंत्री से वन रैंक वन पेंशन लागू करने के लिए एक कमेटी बनाने की मांग की है, जिससे छठे वेतन आयोग में दिए प्रावधानों की गड़बड़ियां सुधारी जा सकें।
ओआरओपी की डिमांड में आंदोलनरत एक्ससर्विसमैन मूवमेंट के रिटायर्ड कर्नल एसएस सोही ने बताया कि सरकार ने बजट प्रावधान कर दिया है अब उसके अनुपालन आदेशों से स्थिति साफ हो पाएगी।
क्या है वन रैंक वन पेंशन
पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन की मांग से एक रैंक और एक समय अवधि तक नौकरी कर रिटायर होने वाले पूर्व सैनिकों को समान बेसिक पेंशन की जानी है।
वर्ष 2006 से पूर्व रिटायर सैनिकों को 2006 के बाद रिटायर होने वाले सैनिकों के समान पेंशन मिलेगी। वन रैंक वन पेंशन से दो हजार से लेकर सात हजार तक विभिन्न रैंकों में पेंशन लाभ होगा।