सैन्य मतों के लिए राजनीतिक दल वन रैंक वन पेंशन से लेकर चीन सीमा पर विकास की धीमी रफ्तार से लेकर पूर्वसैनिक पुनर्वास एवं कल्याण के मुद्दे लेकर उतर रहे हैं।
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कांग्रेस अपने प्रचार में वन रैंक वन पेंशन को भुनाने की तैयारी में है जबकि भाजपा उसका तोड़ तलाश रही है। भाजपा चीन सीमा के सीमांत क्षेत्रों की अनदेखी से लेकर नौसेना, वायुसेना में हादसों का मुद्दा फौजियों के बीच लेकर जाएगी।
पूर्व सैनिकों के कल्याण एवं पुनर्वास का मुद्दा सबसे बड़ा है, जिसको लेकर पार्टियों ने अपने पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ सक्रिय कर दिए हैं। राजनीतिक दल जानते है कि 90 हजार सेवारत और पौने दो लाख पूर्व सैनिक किसी भी प्रत्याशी के समीकरण बना या बिगाड़ सकते हैं।
पांचों लोकसभा सीटों पर फौजियों के मत अहम
लोकसभा चुनावों में राज्य की पांचों लोकसभा सीटों पर फौजियों के मत अहम भूमिका निभाते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के राज्य में तैनात सैन्य बटालियनों को भी स्थानीय मतदान का हिस्सा बनाने का अधिकार देने से स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है।
ऐसे में राजनीतिक दल सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए अलग से कसरत करने में जुट गए हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद महाराज अपने पहले कार्यकर्ता संबोधन में आपदा पुनर्निर्माण और कर्णप्रयाग रेलवे लाइन जैसे मुद्दों से अधिक रक्षा मामलों पर केंद्रीत दिखे।
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उन्होंने चीन सीमा पर अनदेखी से लेकर नौसेना में हादसों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा कर फौजियों का पक्ष लिया। महाराज ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि वन रैंक वन पेंशन मुद्दे पर कांग्रेस के फौजियों के बीच प्रचार की हकीकत खोली जाएगी।
पूर्व सैनिकों के लिए सबसे बड़ी सौगात
कांग्रेस को सर्वाधिक भरोसा एक मई से लागू होने वाली वन रैंक वन पेंशन पर भरोसा है। इसके साथ ही कांग्रेस हाल ही में राज्य स्तर पर लिए लोक लुभावने फैसलों को भुनाने के लिए अपने सैन्य प्रकोष्ठ को सक्रिय कर चुकी है।
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कांग्रेस के पौड़ी सीट से दावेदार जनरल गंभीर सिंह नेगी सैनिकों और पूर्व सैनिकों के बीच पार्टी और यूपीए के फैसलों को ले जाने की तैयारी में हैं।
जनरल गंभीर सिंह नेगी का कहना है कि वन रैंक वन पेंशन यूपीए सरकार की पूर्व सैनिकों के लिए सबसे बड़ी सौगात है। हमारा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ सक्रिय है।
स्थानीय मुद्दों पर घेरेंगे
शहीदों के सम्मान में वार मेमोरियल, पूर्व सैनिकों के बच्चों के लिए भर्ती पूर्व प्रशिक्षण केंद्र बंद होने से लेकर परिवहन बसों में अलंकृत सैनिकों निशुल्क यात्रा जैसे कई मुद्दे पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के बीच उठेंगे।
कांग्रेस अपने कार्यकाल में पूर्व सैनिकों के पुनर्वास व कल्याण के लिए लागू किये फैसलों को भुनाएगी। पूर्व सैनिकों को हाउस टैक्स व स्टांप ड्यूटी में दी गई रियायत के साथ आश्रितों के लिए चल रही सभी योजनाओं में धनराशि को दोगुना किया जाना कांग्रेस बड़ा कदम मान रही है।
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वीरता पदकों से अलंकृत सैनिकों की सम्मान राशि के साथ शहीद होने वाले प्रत्येक सैनिक को 10 लाख का सम्मान देने का फैसला कांग्रेस प्रचारित करेगी। हालांकि भाजपा को इन सब योजनाओं को शुरू करने का श्रेय लेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के कार्यकाल में पूर्व सैनिक कल्याण के लिए किये प्रयास भी भाजपा भुनाएगी।