केंद्रीय बजट में पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन लागू होने से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख पूर्व सैनिकों को फायदा पहुंचेगा जो वर्ष 2006 से पूर्व रिटायर हुए हैं।
बजट प्रावधान होने के बाद पूर्व सैनिकों को उम्मीद है कि अब उनकी लंबे समय से चल रही मांग पूरी होगी। हालांकि वन रैंक वन पेंशन एक अप्रैल 2014 से लागू करने पर पूर्व सैनिक आपत्ति जता रहे हैं। उनका कहना है कि इसे 1 जनवरी 2006 से लागू किया जाना चाहिए।
इतना ही नहीं बजट में मात्र पांच सौ करोड़ का प्रावधान पूर्व सैनिकों को चुनावी स्टंट प्रतीत हो रहा है।
केंद्र सरकार ने बजट में किया प्रावधान
वर्ष 2006 से पूर्व रिटायर हुए सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ दिये जाने के फैसले का यूपीए सरकार ने बजट प्रावधान कर दिया है। इससे जो पूर्व सैनिक एक जनवरी 2006 से पहले रिटायर हुए हैं उन्हें भी अब वही पेंशन मिलेगी जो अब उसी रैंक और सर्विस अवधि में रिटायर हो रहे हैं। यानि सभी सैनिकों की पेंशन समान होगी चाहे वह उसकी रिटायरमेंट की तिथि 2006 से पहले या बाद की हो।
छठे वेतन आयोग ने वन रैंक वन पेंशन की सिफारिश की थी, जिसके बाद पूर्व सैनिकों के एक मुहिम चलाई। अब चुनावी वर्ष होने के चलते सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन लागू तो कर दिया है।
इनका है कहना
हम सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन जिस तरह से केवल पांच सौ करोड़ रुपये वन रैंक वन पेंशन के लिए बजट में रखे गए हैं उससे यह चुनावी घोषणा लगती है।
ब्रिगेडियर (रि) केजी बहल, एक्ससर्विस लीग
लंबे समय से वन रैंक वन पेंशन का इंतजार कर रहे सैनिकों की मांग यूपीए सरकार ने पूरी की है। पूर्व सैनिकों के हितों में उठाया कदम सराहनीय है।
कैप्टन (रि) बलबीर सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ