उत्तराखंड सीएम सेक्रेटरी और आबकारी सचिव रहे आईएएस मो. शाहिद स्टिंग मामले में जल्द ही पीई दर्ज हो सकती है। खबर है कि सीबीआई ने इस संबंध में प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज करने से पहले की औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली हैं। इससे सीएम रावत के स्टिंग प्रकरण से सीबीआई जांच में घिरी सरकार की दिक्कतें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं।
यह मामला कुछ ऐसा है कि इसे राजनीतिक चश्मे के बिना देखना संभव ही नहीं है। जानकार कहते हैं कि जिस तरह से यह स्टिंग चर्चा में आया था, उससे भाजपा को अलग करके देखा ही नहीं जा सकता। दरअसल, इस स्टिंग से सीएम हरीश रावत को ज्यादा दिक्कत होती, इससे पहले ही भाजपा को कांग्रेस में टूट का रास्ता मिल गया था और इसी क्रम में हुए घटनाक्रम में हरीश रावत को सत्ताच्युत होना पड़ा था। लिहाजा इस स्टिंग पर फोकस समाप्त हो गया था।
अब रावत एक बार फिर ताकतवर हो गये तो उन्हें घेरने के सब रास्ते खंगाले जाने लगे। इसी क्रम में इस स्टिंग पर भी तथ्य जुटाए जा रहे हैं। इस स्टिंग से गहराई से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडे कहते हैं कि उनसे सीबीआई ने पूछा है कि वे दिल्ली कब आ सकते हैं? उन्होंने बताया कि वे जल्द ही दिल्ली जाएंगे और उनके पास जो भी तथ्य है, उसे सीबीआई को देंगे।
इधर, स्टिंग की जांच की हलचल की जानकारी अमर उजाला को मिली है। खबर है कि सीएम हरीश रावत के स्टिंग प्रकरण में घिरने के बाद केंद्र अब प्रदेश में कुछ और मामले में तलाश रही है, जिससे आने वाले चुनावों में कांग्रेस की दिक्कतों को बढ़ाया जा सके। रावत सरकार की घेराबंदी के लिए केंद्र से जारी होने वाले फंड को सीबीआई पहले से स्कैन कर रही है, लेकिन अब आबकारी नीति में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
वर्ष 2015-16 की आबकारी नीति में एफएल टू प्रकरण विवादों में रहा है। सीएम सेक्रेटरी शाहिद का नाम भी उससे जुड़ा था, जिसको लेकर विपक्ष ने सीबीआई जांच की मांग भी उठाई थी। सूत्रों की माने तो सीबीआई शाहिद से जुड़े कुछ अहम तथ्यों को खंगाल रही है। आबकारी नीति के अलावा आपदा के दौरान केंद्र के स्पेशल एस्सिमेंट प्लान को लेकर भी जांच एजेंसी की नजर है। दरअसल, 100 प्रतिशत केंद्र पोषित योजनाओं में जांच एजेंसी राज्य सरकार के अनुमोदन के बिना भी जांच शुरू कर सकती है।