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चिर निद्रा में सोया दलित पीड़ा का चितेरा

Mon, 18 Nov 2013 11:12 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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मशहूर दलित साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि का दून के मैक्स अस्पताल में रविवार सुबह देहावसान हो गया। वह लगभग 63 वर्ष के थे। आर्डिनेंस फैक्ट्री से सेवानिवृत्त ओमप्रकाश वाल्मीकि अपने पीछे पत्नी चंदा (चंद्रवती) और एक दत्तक पुत्री को छोड़ गए हैं।
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वाल्मीकि कई दिन से लीवर कैंसर से जूझ रहे थे। वाल्मीकि के निधन से सभी साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, चिंतकों के बीच शोक  की लहर दौड़ गई।

लम्बे समय से थे बीमार
इससे पहले नई दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में भी उनका लंबा इलाज चला था। इस वक्त वह तकलीफ के चलते कई दिन से मैक्स अस्पताल में भर्ती थे।

शनिवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ जाने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। रविवार शाम तीन बजे नालापानी शमशान गृह पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

भतीजे ने दी मुखाग्नि
वाल्मीकि के भतीजे ने उनकी चिंता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर साहित्य, लेखन से जुड़े कई मशहूर नाम सुभाष पंत, जितेन ठाकुर, लीलाधर जगूड़ी, गुरदीप खुराना, कृष्णा खुराना, राजेश पाल, राजेश सकलानी, प्रमोद सहाय, रूपनारायण सोनकर समेत राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना, सुनील, मदन वाल्मीकि, जयपाल सिंह, धर्मपाल, बीएस कंवल, डीपी सिंह आदि मौजूद रहे।
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