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जज्बे को सलाम: रिटायरमेंट के बाद फिर शुरू की पढ़ाई, 80 साल की उम्र में डिग्री पाकर बने मिसाल

Thu, 04 Apr 2019 04:31 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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डिग्री पाने वाले मोहनलाल - फोटो : अमर उजाला
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रिटायरमेंट के बाद जहां लोग सुकून की तलाश करते हैं, वहीं देहरादून के राजेंद्र नगर निवासी मोहनलाल ने नई शुरुआत की है। उन्होंने ओएनजीसी में उप महाप्रबंधक पद से रिटायर होने के बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की।

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पहली सफलता के तौर पर बुधवार को हुए इग्नू के दीक्षांत समारोह में उन्हें मास्टर इन टूरिज्म मैनेजमेंट की डिग्री मिली तो चेहरे की रौनक देखने लायक थी। बोले-जीवन भर पढ़ाई का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

मोहनलाल ओएनजीसी से उप महाप्रबंधक के पद से रिटायर हैं। बंटवारे के समय उनका परिवार क्योटा से भारत आया था। वह बताते हैं कि बचपन से ही पढ़ाई का शौक था। पर पारिवारिक हालातों की वजह से तमन्ना पूरी नहीं हो सकी। छोटे-छोटे काम कर परिवार का गुजारा चलता था। अपनी काबिलियत के बूते उन्हें आईआईटी रुड़की में डिप्लोमा कोर्स में दाखिला मिला। 
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उन्होंने कहा कि सीखने की ललक थी, इसलिए रिटायरमेंट के बाद एक अंतहीन सफर पर निकल पड़े। वह इग्नू से एमबीए, टूरिज्म, एनवॉयरमेंट साइंस एंड सस्टेनेबल डेवलेपमेंट, आपदा प्रबंधन आदि की पढ़ाई कर चुके हैं। वर्तमान में वह इग्नू से सस्टेनेबल साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। 

इससे पहले कोलकाता से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री भी हासिल की। वह बताते हैं कि इस पढ़ाई का उन्हें फायदा हुआ है। वह अपने आसपास के बच्चों को इसी ज्ञान के आधार पर ट्यूशन पढ़ाते हैं। वह नियमित ट्रैकिंग पर जाते हैं और उन्हें बागवानी की भी शौक है। उनका कहना है कि उनका पढ़ने का यह सिलसिला जारी रहेगा।

1454 छात्रों को भी मिली डिग्री  

राजधानी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि के दीक्षांत समारोह में 1454 छात्र-छात्राओं को डिग्री बांटी गई। इग्नू के 32वें दीक्षांत समारोह में 492 को पीजीए, 547 को यूजीए, 292 को पीजी डिप्लोमा और 123 को डिप्लोमा कोर्स पूरा करने पर डिग्री दी गई।  

राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में इग्नू के 32वें दीक्षांत समारोह का आयोजन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। समारोह का शुभारंभ एचएनबी मेडिकल विवि के कुलपति डॉ. हेमचंद्र पांडे ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सीखना एक सतत प्रक्रिया है, जो जीवन पर्यंत चलती रहती है। इसमें उम्र की भी कोई बाध्यता नहीं है। कहा कि ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब व्यक्ति इसे जीवन में उतारे।

यदि हमारा ज्ञान केवल विचारों तक सीमित है, व्यवहार में नहीं आया तो ऐसे ज्ञान का कोई लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि इग्नू विकट परिस्थितियों में भी पढ़ाई करने की चाहत रखने वाले छात्रों के लिए एक बेहतर विकल्प है। समारोह में इग्नू की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आशा शर्मा ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। साथ ही इग्नू के नए कोर्स के बारे में बताया। समारोह में लगभग 200 छात्रों ने हिस्सा लिया। देशभर में 71 छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए हैं।
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क्षेत्रीय केंद्र से अभिषेक तिवारी ने डिप्लोमा इन टूरिज्म में 72 प्रतिशत अंक के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। दूसरी ओर, दिल्ली स्थित इग्नू मुख्यालय से दीक्षांत समारोह का लाइव प्रसारण किया गया। जिसमें उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू मुख्य अतिथि रहे। देहरादून में कार्यक्रम का संचालन अनीता मंमगाई ने किया। इस मौके पर सहायक निदेशक डॉ. जगदंबा प्रसाद, डॉ. रामशरण दीक्षित, अध्ययन केंद्र के समन्वयक डॉ. वीबी चौरसिया, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ. एचएस रंधावा आदि मौजूद रहे। 

इग्नू निदेशक को भी मिली डिग्री 
इग्नू की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आशा शर्मा न केवल अहम जिम्मेदारी संभाल रही हैं बल्कि वह खुद भी इग्नू की छात्रा हैं। उन्होंने इग्नू से पीजी डिप्लोमा इन एजुकेशन टेक्नोलॉजी में डिग्री हासिल की है। बुधवार को उन्हें डिग्री दी गई।   

पर्यटन को आगे बढ़ाने की है तमन्ना 
दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले अभिषेक तिवारी की चाहत है कि वह अपने प्रदेश में पर्यटन को नए मुकाम तक पहुंचाएं। उन्होंने डिप्लोमा इन टूरिज्म स्टडी में गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनके पिता भूपेश तिवारी शिक्षा क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। जबकि माता दीपा गृहिणी हैं। अभिषेक ने बताया कि वह बर्ड वॉचिंग के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। 
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