सरकारी जमीनों पर सालों से कब्जा जमाए बैठे लोगों के नाम इन जमीनों को नियमित करने की तैयारी की जा रही है।
75 हजार परिवारों को फायदा
राज्य सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड के करीब 75 हजार परिवारों को फायदा होगा। राज्यभर में गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट और आसामी पट्टे बड़ी संख्या में हैं। वर्ग-4 की तमाम जमीनों पर भी लंबे समय से लोगों के कब्जे हैं।
तमाम पट्टेधारक अपने पट्टे बेच भी चुके हैं और उनकी जगह दूसरा कोई कई साल से रह रहा है। प्रदेश सरकार ने अब इन कब्जों को नियमित करने का फैसला लिया है।
बताया गया कि इस मसले पर विचार के लिए बनी कैबिनेट की उप समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट 18 अक्तूबर को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक में रखी जाएगी, जिस पर मुहर लगाने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में इसके संकेत देते हुए कहा कि प्रदेश के करीब 75 हजार परिवारों को इसका लाभ मिलेगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान कैबिनेट उप समिति के सदस्य यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह और सुरेंद्र राकेश भी मौजूद थे।
1973 से कब्जे बने हुए हैं
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरिद्वार और ऋषिकेश के 50 हजार परिवार आसामी पट्टे वाले हैं। ये अनुसूचित जाति के परिवार हैं, जिन्हें जिन्हें सन 1973 में कृषि कार्यों के लिए पांच साल का पट्टा दिया गया था। लेकिन तब से अब तक उनके कब्जे बने हुए हैं अथवा उन्होंने किसी और को पट्टे बेच दिया है।
इसी तरह ऊधमसिंहनगर समेत राज्य के जिलों में पूर्वी बंगाल और पाकिस्तान से आए लोगों को गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत जमीनों के पट्टे दिए गए थे। ऐसे करीब 18 हजार से ज्यादा परिवार हैं, जिन्हें ये पट्टे मिले थे।
इनमें से भी कई ने अपने पट्टे बेच दिए थे। इसके चलते उनके पट्टे निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो गई थी। वर्ग-4 की भी जिन जमीनों पर वर्षों से कब्जा है। इन कब्जेधारियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल, अंत्योदय और सामान्य कटेगरी के लोग भी हैं।
सकारात्मक निर्णय
सरकार अब उनके हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 अक्तूबर की कैबिनेट बैठक में ही कब्जों को नियमित करने की प्रक्रिया तय होगी।
जमीन का नियमितीकरण पट्टेधारक के नाम होगा अथवा जो वर्तमान में कब्जाधारी है? इस सवाल पर भी मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में ही स्थिति साफ होगी। लेकिन लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय ही लिया जाएगा।
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