उत्तराखंड में पीसीएस अफसरों को बैकडेट से प्रमोशन और एरियर का लाभ देने के मामले ने तूल पकड़ा तो मालूम चला है कि केवल पीसीएस ही नहीं, बल्कि तमाम सेवा के अधिकारियों को भी इसी तर्ज पर प्रमोशन दिया जा चुका है।
इन्हें भी एरियर का लाभ मिला है। खबर है कि ठीक से पड़ताल की जाए तो अन्य सेवाओं में इसी तरह के लाभ दिए जाने के मामले बड़ी संख्या में सामने आएंगे। वहीं पीसीएस अफसरों की प्रोन्नति आदेश को आधार बनाकर कई अधिकारी बैक डेट से प्रमोशन देने की मांग को लेकर प्रत्यावेदन देने की तैयारी कर रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश के तीस पीसीएस अधिकारियों को शिथिलीकरण के जरिए बैकडेट में प्रमोशन देने और बढ़े वेतन का एरियर देने के मामले में नियम-कानून को ताक पर रखने की खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर मुख्य सचिव ने शासनादेश को फिलहाल रोकते हुए प्रमोशन के आधारों के परीक्षण के आदेश दिए हैं।
बुधवार को इस आदेश से सचिवालय में खलबली मची रही। कुछ अफसरों ने पूर्व में तमाम सेवाओं से जुड़े अफसरों को इसी तर्ज पर प्रमोशन दिए जाने की बात को आला अफसरों के समक्ष रखा है। इसमें प्रमुख तौर पर वित्त, कृषि और शिक्षा विभाग का नाम लिया जा रहा है। यदि गहराई से पड़ताल की जाए तो नियम विरुद्ध तरीके से बैकडेट में प्रोन्नति देने के सैकड़ों मामले सामने आएंगे।
नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि राज्य गठन के वक्त अफसरों की कम संख्या को देखते हुए प्रमोशन प्रक्रिया तेज करके अधिकारियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिथिलीकरण नियमावली का सहारा लिया गया था। मगर धीरे-धीरे तमाम विभागों ने इस नियमावली की व्याख्या अपने-अपने हिसाब से करते हुए प्रमोशन करना शुरू कर दिया। इसी के चलते विसंगति उत्पन्न हो गई है। शासन को चाहिए कि शिथिलीकरण नियमावली को एक समान करके लागू करवाना चाहिए।
आईएएस से ऊपर निकल जाएंगे पीसीएस
पीसीएस अफसरों को दिए गए प्रमोशन से प्रदेश के आईएएस अधिकारी खासे नाराज हैं। एक अधिकारी ने बताया कि उनकी सेवा में 7600 ग्रेड-पे तक पहुंचने में नौ साल की सेवा आवश्यक है। यदि कोई अधिकारी वर्ष 2005 में सेवा में आता है तो उसे वर्ष 2013 में इसका लाभ मिलेगा। ऐसे ही पीसीएस अफसर को यहां तक आने के लिए 12 साल की सेवा चाहिए होती है।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई अधिकारी वर्ष 2005 में सेवा में आता है, तो वर्ष 2009 में वह 5400 ग्रेड-पे से 6600 ग्रेड-पे में पहुंचता है। इसके बाद नियमानुसार वर्ष 2016 में विशेष श्रेणी यानी 7600 ग्रेड-पे का लाभ मिलना चाहिए। यदि विशेष श्रेणी में प्रमोशन के लिए शिथिलीकरण का लाभ दिया जाता है तो उसे साढ़े तीन वर्ष में ही प्रोन्नत वेतनमान का लाभ मिल जाना चाहिए। मगर शिथिलीकरण के नियम को तोड़मरोड़ कर प्रमोशन दिया जा रहा है।
इसमें कुल बारह वर्ष की सेवा को शिथिलीकरण करके आधा कर दिया जा रहा है। यानी नियमानुसार जो ग्रेड-पे शिथिलीकरण के बाद साढ़े आठ साल में मिलना चाहिए, वह महज छह साल में ही दे दिया जा रहा है। ऐसे में वेतन के मामले में पीसीएस अधिकारी अपने सीनियर बैच के आईएएस अधिकारी से अधिक वेतन ले रहे हैं। आईएएस एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने बताया कि यदि शासन स्तर पर इस व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जाता है तो वे सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।
नियमों के मुताबिक जिस तिथि में प्रमोशन मिलना है, उसी तिथि से प्रमोशन का लाभ मिलता है। यदि किसी बैच विशेष में जूनियर अफसर प्रमोट हो जाता है तो नोशनल प्रमोशन देने की व्यवस्था है। मगर इसमें एरियर देने का कोई प्रावधान नहीं है। ताजा प्रमोशन में भारी अनियमितताएं हैं। यदि इस तरह का लाभ पीसीएस अफसरों को दिया जा रहा है तो सचिवालय एवं अन्य सेवा संवर्गों के लिए भी यही व्यवस्था की जाए। इस मुद्दे पर आज संघ की बैठक की जाएगी, जिसमें रणनीति तय की जाएगी।
- दीपक जोशी, अध्यक्ष (सचिवालय संघ)