सुप्रीम कोर्ट से उत्तराखंड सरकार को बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सचिवालय के विस्तार के लिए सरकार द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण को सही बताया है। राज्य सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति पीसी पंत की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को स्वीकार कर लिया है। पीठ ने हाईकोर्ट को फैसले को गलत बताते हुए सरकार द्वारा किए गए अधिग्रहण को सही बताया है। मामला देहरादून के सचिवालय को उत्तर और दक्षिण में विस्तार करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा किए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है।
चार मई, 2004 में एक अधिसूचना के जरिये भूमि अधिग्रहण का निर्णय लिया गया था। अधिग्रहण को जरूरी बताकर अधिसूचना जारी की गई थी। सरकार ने कलेक्टर की रिपोर्ट को देखने के बाद यह निर्णय लिया था। पीठ ने प्रतिवादियों की उस दलील को खारिज कर दिया कि लोक निर्माण विभाग के सचिव को कलेक्टर की रिपोर्ट पर विचार करने और उसे अप्रूव करने का अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि विभागीय सचिव राज्य की ओर से निर्णय ले सकता है।