विकास कार्यों से जुड़ी एजेंसी के एक बड़े अधिकारी फुटबॉल के बड़े खिलाड़ी हैं। जी नहीं, यह मैदान पर फुटबाल नहीं खेलते, बल्कि अपने प्रोजेक्ट्स को फुटबॉल बनाए हुए हैं।
किसी भी कार्य के बारे में पूछिए कि रुका क्यों है? तो तुरंत दूसरे पर पास कर देते हैं। हैरत की बात तो यह जिस कार्य की जिम्मेदारी उन्हीं पर बनती है, उसके लिए भी वह निचले अधिकारियों पर तोहमद देना नहीं भूलते।
कभी उन्हें काहिल बताते हैं तो कभी लापरवाह। बेहद सुस्त चाल से चाहे जितने कदम काम बढ़ा हो, उसका क्रेडिट लेने से नहीं चूकते। उनकी देखा-देखी निचले अधिकारी भी यह खेल सीख रहे हैं। तुर्रा यह-बास को फालो कर रहे हैं।