सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्रीय सेवाओं व अखिल भारतीय सेवा के अफसरों के लिए भारी पड़ सकती है। कैसे जानने के लिए पढ़ें..
आयोग की सिफारिशों में जो एक प्रावधान जोड़ा है, उससे अखिल भारतीय सेवाओं के अफसर बड़े पैमाने पर प्रभावित होंगे। सिफारिश लागू होते ही इन अफसरों के रिटायरमेंट 58 साल की उम्र में हो जाएगा या फिर सेवा काल अधिकतम 33 वर्ष होगा। आयोग की सिफारिश जनवरी 2016 से लागू किया जाना प्रस्तावित है।
राज्य में तीन अखिल भारतीय सेवाएं कार्यरत रहती हैं। इनमें पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) व भारतीय वन सेवा (आईएफएस) शामिल हैं। सूत्रों की माने तो सातवें वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशों में एक प्रावधान केतहत अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों को गहरा झटका दिया है।
प्रावधान यह है कि राज्य या केंद्र में तैनात आईएएस, आईपीएस व आईएएफएस की रिटायरमेंट की उम्र सीमा 60 वर्ष के बजाय 58 वर्ष होगी। यदि इससे पहले किसी अफसर की 33 साल की सर्विस पूरी हो जाती है तो वह 58 वर्ष से पहले ही रिटायर हो जाएगा।
उत्तराखंड में क्या पड़ेगा प्रभाव?
आईएएस में केंद्र तैनात 1981 बैच के अमरेंद्र सिन्हा जून 2017, 1983 बैच के अफसरों में अंजलि प्रसाद मई 2017, शत्रुघ्न सिंह दिसम्बर 2016, चंचल कुमार तिवारी 2019, बीपी पांडेय मार्च 2016, राज्य में तैनात अपर मुख्य सचिव एस राजू अप्रैल 2016 में रिटायर होने थे।
लेकिन सातवें वेतन आयोग की संस्तुति लागू हुई तो जनवरी 2016 तक इन सभी का रिटायरमेंट हो जाएगा। इनके बाद 1985 बैच के अनूप वधावन राज्य के वरिष्ठ आईएएस होंगे। और राज्य सरकार की मजबूरी हो जाएगी कि उन्हें या उनके समकक्ष किसी अफसर को केंद्र से वापस लाकर मुख्य सचिव बनाए।
आईपीएस में 1979 बैच के बीएस सिद्धू (मौजूदा डीजीपी) का रिटायरमेंट अप्रैल 2016, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर स्पेशल डीजी सीआरपीएफ केपद पर तैनात 1982 बैच केएसके भगत जून 2017 में रिटायर होने थे।
लेकिन आयोग का प्रावधान लागू होते ही 33 साल की सेवा पूरी करने की एवज में जनवरी 2016 में ही रिटायर हो जाएंगे। इनके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय में तैनात संयुक्त सचिव 1986 बैच के आईपीएस एमए गणपति सबसे वरिष्ठ आईपीएस होंगे।