नर्सों की मुख्य मांग ग्रेड पे को लेकर उत्तराखंड सरकार फैसला नहीं ले पाई है, जबकि वाहन भत्ते की वृद्धि पर मुहर लग गई है।
आंदोलन समाप्त नहीं हुआ
सरकार की आंशिक तौर पर नर्सों की मांगे मानने के बावजूद उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। नर्सिंग एसोसिएशन ने मांगों के शासनादेश जारी नहीं होने तक अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है। 20 जनवरी तक नर्सें क्रमिक अनशन पर रहेगी और उसके बाद हड़ताल पर उतर सकती हैं।
नर्सों की हड़ताल समाप्त करवाने के लिए सरकार के स्तर पर कुछ मांगों पर सहमति बनी है। नर्सों को पहले साइकिल भत्ता में महज डेढ़ सौ रुपए से उसे वाहन भत्ते में परिवर्तित कर 12 सौ रुपए कर दिया है।
नर्सिंग भत्ता बढ़ाकर चार हजार रुपए करने की मांग सहित नर्सों के ग्रेड पे और सेवा नियमावली में निदेशक तक के पद का सृजन किये जाने पर मंत्रिमंडल से मुहर नहीं लगी है। नर्सें मांगों के समर्थन में क्रमिक अनशन को 20 नवंबर तक करने का फैसला ले चुकी हैं।
एक शिफ्ट में काम कर रही नर्सों ने चेताया है कि अगर शासनादेश जारी नहीं हुए तो पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
शासनादेश और आश्वासन मिले तो माने
नर्सिंग एसोसिएशन ने साफ किया है कि सरकार भत्तों को बढ़ाने के शासनादेश करने के साथ ग्रेड पे और ढांचा पुनर्गठन पर ठोस आश्वासन दे तो वह आंदोलन समाप्त करने पर फैसला कर सकती हैं।
नर्सिंग एसोसिएशन की प्रांतीय महामंत्री कृष्णा रावत ने कहा कि जब तक उन्हें शासनादेश की कापी नहीं मिलती आंदोलन बंद नहीं होगा।
ग्रेड पे, ढांचा पुनर्गठन कर स्केल रिवाइज करने जैसी मांगों पर सरकार आश्वासन दे कि इतनी अवधि के भीतर लागू कर दिया जाएगा और तुरंत डीडीएनए (डिप्टी डायरेक्टर नर्सिंग) का पद भरा जाए।