उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एनआरएचएम में हुए दवा घोटाले की लिए सीबीआई इंक्वायरी की सिफारिश की है।
केंद्र से सीबीआई जांच की सिफारिश
यह घोटाला बीजेपी के शासनकाल में हुआ था। रावत द्वारा केंद्र से सीबीआई जांच की सिफारिश करने से पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
2008 में शासन स्तर पर हुई जांच में यह घोटाला साबित हुआ था। रावत द्वारा उठाए गए इस कदम को बीजेपी ने राजनीतिक स्टंट बताया है।
सीएजी (कंट्रोलर आडिटर जनरल) के प्रकियाधीन एनआरएचएम परफार्मेंस आडिट में दवा खरीद में गड़बड़ी को चिहिन्त किया गया था।
दवाएं खरीद, वितरण को लेकर गड़बड़ियां
2009 में मामला उजागर होने के बाद तत्कालीन वित्त सचिव एलएम पंत को प्रकरण की जांच सौंपी गई थी। जांच सिर्फ एक्सपायर दवाओं की हुई, जिसमें सौंपी रिपोर्ट में सिर्फ प्रक्रियात्मक गड़बड़ियां चिन्हित की गई।
इसके बाद निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम ने मामले की जांच की तो उन्होंने भी दवाएं खरीद से लेकर उसके वितरण को लेकर अपनाई प्रक्रिया में गड़बड़ियां पाईं।
इसके बाद अप्रैल 2013 में आईएएस पीयूष सिंह की रिपोर्ट ने पर्दा उठाया। रिपोर्ट से पहली बार घोटाला साबित हुआ जिसमें 1.21 करोड़ रुपए की अनियमितता सामने आई।
जांच रिपोर्ट में मुख्य आरोपी तत्कालीन संयुक्त निदेशक (आरसीएच) डॉ. आशा माथुर (बाद में डीजी बनी) सहित पांच सीएमओ, फार्मासिस्ट और ड्राईवर दोषी चिन्हित कर रिकवरी की संस्तुति दी गई।