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एमडीडीए में अब आवासीय भवनों के मानचित्रों को 15 दिनों तो व्यावसायिक भवनों को 30 दिनों में मिलेगी स्वीकृति

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राजधानी के आवासीय और व्यावसायिक भवन स्वामियों के लिए राहत भरी खबर है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से अब आवासीय भवनों के मानचित्र जहां सिर्फ 15 दिनों के भीतर स्वीकृत किए जाएंगे, वहीं व्यावसायिक भवनों के लिए 30 दिन के अंदर मानचित्र स्वीकृत करके भवन स्वामी को सौंपने का निर्णय लिया गया।
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प्राधिकरण उपाध्यक्ष बीके संत ने सोमवार को मानचित्र स्वीकृति प्रणाली के साथ ही कई प्रकार की पत्रावलियों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि तमाम ऐसी पत्रावलियां हैं, जिसे अधिकारी और इंजीनियर दबाए बैठे हैं। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने उक्त आदेश जारी किया। उपाध्यक्ष ने आवासीय भवनों के मानचित्र जहां 15 दिन के अंदर निस्तारित करने के आदेश दिए, वहीं व्यावसायिक भवनों के मानचित्रों के निस्तारण की समय सीमा भी निर्धारित करते हुए 30 दिन कर दिया। निर्धारित अवधि में यदि आवासीय और व्यावसायिक भवनों के मानचित्र स्वीकृत नहीं किए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
संत ने बताया कि आवासीय भवनों की पत्रावली के निस्तारण में जूनियर इंजीनियरों को पांच दिन, असिस्टेंट इंजीनियरों को दो दिन के भीतर मानचित्र स्वीकृत संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा कर पत्रावली देनी होगी। जहां तक व्यावसायिक भवनों के मानचित्रों का सवाल है, तो कैशियर एक दिन, लिपिक एक दिन, भूउपयोग दो दिन, जूनियर इंजीनियर 12 दिन, एसई तीन दिन और सचिव को चार दिनों के भीतर पत्रावलियां निस्तारित करनी होंगी। अधिकारियों को चेताया कि निर्धारित अवधि से अधिक किसी भी अधिकारी या इंजीनियर ने पत्रावली अपने पास रखी और निस्तारण नहीं किया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में सचिन मोहन सिंह बर्निया, एसई हरिश्चंद्र सिंह राणा समेत तमाम अधिकारी और इंजीनियर मौजूद थे।
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दो बार सूचना के बाद भी निस्तारण नहीं तो पत्रावली निरस्त
अफसरों और इंजीनियरों ने बताया कि पत्रावलियों के निस्तारण में आर्किटेक्ट सहयोग नहीं कर रहे हैं। मानचित्र बनाने वाले आर्किटेक्ट को आपत्तियों के निस्तारण के लिए कई बार सूचित किया जाता है, लेकिन निस्तारण नहीं करते हैं। प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए कि पत्रावलियों की आपत्तियों के निस्तारण को लेकर आर्किटेक्ट को दो बार सूचित किया जाएगा और यदि निस्तारण नहीं करता, तो पत्रावली को निरस्त कर दिया जाए। साथ ही ऐसे आर्किटेक्ट को चिह्नित कर उनके लागिन को तब तक बाधित रखा जाए, जब तक कि वह पूर्ण रूप से प्राधिकरण के नियमों से अवगत न हो जाएं।
पत्रावलियों के निस्तारण में देरी पर कारण बताओ नोटिस
एमडीडीए में आवासीय और व्यावसायिक भवनों की पत्रावलियों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों पर प्राधिकरण उपाध्यक्ष बीके संत ने शिकंजा कस दिया है। कई अधिकारियों, इंजीनियरों को चिह्नित कर कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि तमाम ऐसे अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी हैं, जो आवासीय और व्यावसायिक भवनों से जुड़ी पत्रावलियों को दबाए बैठे हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने न सिर्फ अफसरों, कर्मियों की क्लास ली, वरन हिदायत दी कि आवासीय, व्यावसायिक भवनों से जुड़ी पत्रावलियों के निस्तारण में तेजी लाएं। उपाध्यक्ष ने ऐसे सभी अधिकारियों, इंजीनियरों एवं कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश जारी किया। प्राधिकरण में तमाम ऐसे अधिकारी, इंजीनियर्स और कर्मचारी हैं जो बेवजह पत्रावलियों को दबाए बैठे रहते हैं। मा.सि.रि.
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