प्रदेश के मुखिया हरीश रावत के ‘बेघर’ होने के बाद अब शासन के सर्वोच्च अफसर यानी मुख्य सचिव सुभाष कुमार के ‘लापता’ होने की गड़बड़ी सामने आई है।
मुख्य सचिव की वोटर आईडी में भी मकान नंबर गायब है। ऐसे में वोटर स्लिप पहुंचाने में बीएलओ को पसीने छूट गए।
काफी दौड़धूप के बाद मालूम हुआ कि जिस क्षेत्र में वोटर आईडी बनवाई गई है, मुख्य सचिव अब वहां रहते ही नहीं हैं। तीन दिन की मशक्कत के बाद बीएलओ नए आवास में आईडी पहुंचा आया।
फिर सामने आई वोटर स्लिप में गड़बड़ी
निर्वाचन आयोग इस बार मतदाताओं के घर तक वोटर स्लिप पहुंचा रहा है। रायपुर विधानसभा क्षेत्र के अधोईवाला के बीएलओ को वोटर सुभाष कुमार और परिजनों की कुल चार स्लिप पहुंचाने के लिए दी गईं।
बीएलओ को मालूम नहीं था कि यह सुभाष कुमार प्रदेश के मुख्य सचिव हैं। स्लिप पर एमडीडीए कालोनी, अधोईवाला का पता दर्ज था, लेकिन मकान नंबर नहीं।
बीएलओ बिना मकान नंबर के तीन दिन तक सुभाष कुमार को तलाशता रहा। लोगों ने बताया कि इस नाम का कोई व्यक्ति यहां नहीं रहता है।
मतदाता जागरूकता अभियान की खुली पोल
शुक्रवार शाम बीएलओ को पता चला कि यह स्लिप मुख्य सचिव की है और वह काफी समय पूर्व राजपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अंसारी मार्ग पर शिफ्ट हो चुके हैं।
इसके बाद बीएलओ मुख्य सचिव के अंसारी मार्ग आवास पर वोटर स्लिप देकर आ गया।
अफसर खुद ही सुस्त
निर्वाचन आयोग ने कुछ समय पूर्व मतदाता जागरूकता अभियान के तहत हर वोटर का नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की पहल की थी। लेकिन आयोग के अभियान पर प्रदेश के अफसर ही सुस्त बने रहे।
सूत्रों की मानें तो रायपुर विस क्षेत्र से राजपुर शिफ्ट होने पर मुख्य सचिव को फार्म छह और सात भरकर निर्वाचन कार्यालय को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। इसके बाद उन्हें नई वोटर आईडी इश्यू कर दी जाती। लेकिन, मुख्य सचिव ने ऐसा नहीं किया।
सूत्रों के मुताबिक उनके अलावा कई वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस अफसरों की वोटर आईडी में भी पते की गड़बड़ी है।