दोहा गांव स्थित मंदिर में प्रवास कर रहे छत्रधारी चालदा महासू देवता की अब एक ही पालकी होगी। देवता से अनुमति मिलने के बाद खत शैली के लोगों ने यह निर्णय लिया है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि मंदिर में मौजूद दोनों पालकियों को एक किया जाएगा।
थैना मंदिर से जगह-जगह प्रवास पर जाने वाले छत्रधारी चालदा महासू देवता इस समय दोहा गांव स्थित मंदिर में प्रवास कर रहे हैं। वैसे तो मान्यता के अनुसार देवता की एक ही पालकी होती है, लेकिन 10 मई 2014 में देवता के ग्राम चंदोऊ प्रवास पर आने के दौरान खत अठगांव के ग्रामीणों ने एक और पालकी बना दी थी। इसके बाद से देवता दो पालकी के साथ प्रवास कर रहे हैं। दो जून को दोहा में 15 खतों के लोगों की महापंचायत हुई थी। इसमें देवता की दो पालकियों को एक करने पर चर्चा हुई थी। अधिकतर ग्रामीणों का मानना था कि पालकी एक ही रहनी चाहिए। लेकिन, यह तय हुआ कि इसका निर्णय देवता ही करेंगे। महापंचायत के बाद चुने गए लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को चालदा महाराज के मूल थरण थैना मंदिर पहुंचा। यहां देवता के पुजारी और देवता के बकरे से पूछकर दोनों पालकियों को एक बनाने का निर्णय लिया गया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि अब सभी 15 खतों के लोगों की एक समिति बनाई जाएगी। इनके दिशा-निर्देशन में दोनों पालकियों को एक किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में अर्जुन सिंह मेहता, बलदेव सिंह, सुनील राज जोशी, गंभीर सिंह, विजयपाल, राजेंद्र सिंह तोमर, दयाराम शर्मा, हरदेव सिंह तोमर, शूरवीर सिंह, रविंद्र चौहान, राजेंद्र सिंह चौहान, दीवान भंडारी, संजय भट्ट आदि शामिल रहे।