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स्लीप एपनिया बीमारी की जांच कराने को लेकर अब नईदिल्ली, मुंबई के बड़े अस्पतालों का नहीं लगाना होगा चक्कर

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स्लीप एपनिया बीमारी से जूझ रहे मरीजों को अब जांच और इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों की देखरेख में दून अस्पताल में ही मरीजों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए दून अस्पताल में अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं से लैस स्लीप लैब स्थापित की जा रही है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही स्लीप लैब की स्थापना कर बीमारी से पीड़ित मरीजों की जांच और इलाज किया जाएगा।
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जानें क्या है स्लीप एपनिया
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, स्लीप एपनिया नींद की बीमारी है। इसका मरीज रात को सोते समय अचानक उठकर बैठ जाता है। सोते समय बेचैन होकर करवटें बदलता रहता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। कई बार सीने में तेज दर्द होने के साथ पसीना आता है। बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस होती है। मरीज का सिर भारी हो जाता है।
गंभीर स्थिति में हार्टअटैक, पैरालाइसिस खतरा
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, स्लीप एपनिया बीमारी का समय पर इलाज नहीं होने से खतरा बढ़ जाता है। स्थिति गंभीर होने पर मरीज को हार्टअटैक का खतरा रहता है। साथ ही पैरालाइसिस की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में समय रहते इलाज कराने की जरूरत है
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स्लीप एपनिया के कारण
मोटापा और गले की मोटाई अधिक बढ़ने से स्लीप एपनिया की आशंका बढ़ जाती है।
अत्यधिक शराब और सिगरेट के सेवन से भी बीमारी होने की आशंका बनी रहती है।
बहुत अधिक जंक फूड के इस्तेमाल से भी स्लीप एपनिया होने का खतरा रहता है।
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