राजकीय मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग कॉलेजों में आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मचारी मुहैया कराने वाली निजी कंपनी टीडीएस मैनेजमेंट कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कंसल्टेंसी चार्ज वसूलने के मामले में जांच के आदेश जारी किए गए हैं। आरोप है कि कंपनी ने कर्मचारियों की नियुक्ति के एवज में कंसल्टेंसी चार्ज के रूप में 25 से 40 हजार रुपये की धनराशि वसूली। मामला सामने आने पर अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने कंपनी को नोटिस भी जारी किया है।
डॉ. आशुतोष सयाना के मुताबिक, टीडीएस मैनेजमेंट कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उसने कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए सिक्योरिटी मनी वसूली है। इससे राज्य सरकार और शासन की छवि खराब हुई। वहीं, राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और प्रशिक्षित बेरोजगारों में इसे लेकर काफी रोष है। उन्होंने कहा कि निविदा की शर्तों में कर्मचारियों की नियुक्ति के एवज में कंसल्टेंसी चार्ज के रूप में सिक्योरिटी मनी लिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। लिहाजा कंपनी अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। यदि कंपनी अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो कंपनी को काली सूची में डालने के साथ ही समझौता रद्द कर दिए जाएगा।
उक्रांद ने कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया
कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए सिक्योरिटी मनी वसूलने को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने टीडीएस कंपनी के खिलाफ चिकित्सा शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन किया। दल के केंद्रीय मीडिया प्रभारी शिवप्रसाद सेमवाल की अगुवाई में यूकेडी कार्यकर्ताओं ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों से वार्ता भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनी ने कर्मचारियों से वसूली गई धनराशि नहीं लौटाई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। उक्रांद पदाधिकारियों ने मांग उठाई कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कर्मचारियों की भर्ती एनएचएम, पीआरडी या उपनल के जरिये की जाय।