लोकसभा चुनाव में धमाकेदार जीत हासिल करने के बाद भाजपा के वरिष्ठतम नेता मे.ज. रिटा. भुवन चंद्र खंड़ूड़ी मुश्किल में हैं।
रुड़की की एक अदालत ने अधिवक्ता को अपमानित करने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और पौड़ी से नवनिर्वाचित सांसद बीसी खंडूड़ी, तत्कालीन गंगनहर कोतवाली प्रभारी रघुवीर सिंह असवाल, एलआईयू प्रभारी समेत दस पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किया है।
मामला वर्ष 2011 का है। गांव ढंडेरा में भाजपा सैनिक प्रकोष्ठ के कार्यक्रम में पहुंचे अधिवक्ता बलवीर सिंह ने जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र का मुद्दा तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के समक्ष उठाया था।
सार्वजनिक तौर पर किया था अधिवक्ता का अपमान
आरोप है कि खंडूड़ी के इशारे पर उन्हें पुलिसकर्मियों ने सभा स्थल से बाहर निकाल दिया था। आरोप था कि सार्वजनिक तौर पर उनका अपमान किया गया।
तब अधिवक्ता ने रुड़की की एक अदालत में वाद दायर किया था, निचली अदालत ने वाद खारिज कर दिया था।
निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए वादी अधिवक्ता ने एडीजे कोर्ट में चुनौती दी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता आलोक पुंडीर ने बताया कि एडीजे अरविंद कुमार ने शनिवार को सुनवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी, गंगनहर के कोतवाल रहे रघुवीर सिंह असवाल, एलआईयू प्रभारी समेत दस कांस्टेबलों को नोटिस जारी किया है।
श्रीनगर के लोगों को खंडूड़ी से उम्मीदें
पौड़ी क्षेत्र से पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी की जीत और केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल होने की उम्मीदों से शहर के लोगों को विकास को लेकर आस जगी है।
पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की जीत ने भाजपाइयों के अलावा आम जनता के भी चेहरे खिला दिए हैं। लोगों को उम्मीद है कि अटल बिहारी वाजपेयी की तरह मोदी सरकार में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी।
एडवोकेट भूपेंद्र भंडारी, शैलेंद्र अग्रवाल, आयुष पंत आदि को मेडिकल कॉलेज व राजमार्गों की हालत सुधरने की आस जगी है।
उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी महत्वकांक्षी योजना को धरातल पर उतारा। राजकीय मेडिकल कालेज खंडूड़ी का बड़ा सपना था, मगर इसकी दयनीय हालत से काफी आहत हैं।
खास तौर से एमबीबीएस कोर्स की फीस बढ़ाए जाने पर वो कई बार नाराजगी जता चुके हैं। इसके अलावा चौरास क्षेत्र लोगों चौरास मोटर पुल के निर्माण कार्य को गति मिलने की आसा है।
केंद्रीय सड़क राजमार्ग मंत्री रहते खंडूड़ी ने 28 जनवरी 2004 को चौरास मोटर पुल को स्वीकृति दिलवाई थी।
दो साल में खिसका कांग्रेसी विधायकों का जनाधार
पौड़ी लोकसभा चुनाव परिणामों से साफ हो गया कि संसदीय क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक दो साल में ही अपना जनाधार खो चुके हैं।
किसी भी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेसी प्रतयाशी बढ़त बनाना तो रहा दूर टक्कर देते भी नजर नहीं आए। सभी विधानसभा क्षेत्रों से पंजे पर कमल ही हावी रहा।
पौड़ी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 14 में से 10 विधानसभाओं में कांग्रेसी विधायक हैं।
इनमें से कांग्रेस प्रत्याशी व रुद्रप्रयाग के विधायक हरक सिंह रावत, कोटद्वार के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, रामनगर की विधायक अमृता रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
कर्णप्रयाग के विधायक अनुसूया प्रसाद मैखुरी डिप्टी स्पीकर, श्रीनगर के विधायक गणेश गोदियाल, बदरीनाथ के विधायक राजेंद्र भंडारी दायित्वधारी हैं। देवप्रयाग क्षेत्र के निर्दलीय विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।
लेकिन इस चुनाव में इनमें से कोई भी अपने विधान सभा क्षेत्र में पार्टी की लॉज नहीं बचाने कामयाब नहीं रहा है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जिस कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र से बीसी खंडूड़ी को हार का मुंह देखना पड़ा था। इस चुनाव में उन्हें उसी कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधिक 23112 वोटों से लीड मिली।
पौड़ी विधान सभा में सबसे कम लीड
भाजपा प्रत्याशी भुवन चंद्र खडूड़ी को पौड़ी विधान सभा क्षेत्र से सबसे कम 7004 वोटों से बढ़त मिली।
बाकी अन्य विधान सभाओं में से चौबट्टाखाल में उन्हें 8273, लैंसडौन में 8612, बद्रीनाथ में 10542, थराली में 12377, कर्णप्रयाग में 11562, केदारनाथ में 10189, रुद्रप्रयाग में 16185, देवप्रयाग में 15640, नरेंद्रनगर में 18446, यमकेश्वर में 14357, श्रीनगर में 11132, कोटद्वार में 23112, रामनगर में 14139 मतों से लीड मिली।