देहरादून। राजधानी के अशासकीय विद्यालय खोल तो दिए गए, लेकिन बजट की तंगी में सैनिटाइजेशन की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। राजकीय विद्यालयों को सरकार द्वारा बजट मिल रहा है, लेकिन अशासकीय विद्यालयों में शिक्षक खुद की जेब से सैनिटाइजर व सफाई व्यवस्था का खर्चा वहन कर रहे हैं। ऐसे में उत्तरांचल प्रधानाचार्य परिषद ने सैनिटाइजेशन की व्यवस्था कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
उत्तरांचल प्रधानाचार्य परिषद ने सैनिटाइजेशन के लिए ग्रांट देने की मांग की है। इसे लेकर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), सचिव शिक्षा व शिक्षामंत्री को भी पत्र भेजा है। प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश महामंत्री अवधेश कुमार कौशल ने कहा कि राजकीय विद्यालयों में सैनिटाइजेशन के लिए बजट जारी किया है, लेकिन अशासकीय विद्यालयों को कुछ नहीं दिया है। फिलहाल प्रधानाचार्य व शिक्षक पैसे जुटाकर सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनर व मास्क खरीद रहे हैं। कई विद्यालयों ने सामाजिक संस्थाओं से भी सहयोग लिया।
प्रबंधन भी खींच रहे हाथ
गांधी इंटर कॉलेज देहरादून (निकट तहसील) में प्रबंधन ने एक महीने की सैनिटाइजेशन व्यवस्था के लिए आर्थिक मदद दी है, लेकिन इसके बाद मदद जारी रखने में असमर्थता भी जताई है। प्रधानाचार्य परिषद के जिलामंत्री अवतार सिंह चावला ने कहा कि विद्यालयों पर गाइडलाइन का पालन करने का दबाव है, लेकिन उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कम पैसे पर सफाई वाले भी भागे
नारी शिल्प कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य मंजू रावत ने बताया कि विद्यालय में सैनिटाइजेशन में आने वाला खर्च खुद उठा रहे हैं। सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए क्लास को नियमित रूप से सैनिटाइज किया जा रहा है। छात्राओं को सैनिटाइजर व मास्क दिए जाते हैं। अब आर्थिक संकट आ गया है। विद्यालय खुलने से पहले पूरे परिसर की सफाई (झाड़ी व अन्य कार्य) के लिए एक कर्मी ने 4 हजार रुपये की मांग की है, लेकिन दो हजार रुपये में काम करने का आग्रह किया तो वह काम छोड़कर भाग गया।