देहरादून स्थित पेयजल निगम में भारी अव्यवस्थाओं के बीच जहां कर्मचारी आर्थिक तंगी की मार झेल रहे हैं वहीं जोड़तोड़ के चलते एक अधिकारी बिना पद पोस्टिंग के साथ खाली बैठकर मोटी पगार उठा रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोला
मामले का खुलासा हुआ तो कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। पेयजल निगम में कई दिनों से हड़ताल चल रही है। कर्मचारी वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी पेंशन समय से ना मिलने का रोना रो रहे हैं। उधर निगम को घाटे से उबारने के प्रयास भी नहीं किए जा रहे हैं।
इस सबके बीच विभाग को पिछले कई महीनों से बेवजह आर्थिक बोझ से दो चार होना पड़ रहा है। मामला कुछ यूं है कि 29 जून को डीपीसी के पश्चात एई से ईई तक सभी को नियुक्ति दे दी गई। इसी दौरान एक ईई को कार्यालय अधीक्षण अभियंता (एसई) यांत्रिक में पोस्टिंग दे दी गई। चौंकाने वाली बात तो यह है कि यहां ईई का कोई पद ही नहीं है।
ईई कभी कार्यालय तक नहीं गए
मामला खुला तो कर्मचारी संगठनों की ओर से मांग की गई कि हल्द्वानी यांत्रिक इकाई में ईई का पद लंबे समय से रिक्त है और वहां सहायक अभियंता को ही ईई का प्रभार दिया गया है।
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ऐसे में इनकी पोस्टिंग वहां कर दी जाए। बावजूद इसके ईई को प्रतीक्षारत रखने की बात करते हुए प्रबंधन की ओर से चार महीने तक वेतन दिया जाता रहा। इतना ही नहीं ईई कभी कार्यालय तक नहीं गए लेकिन वेतन उठाते रहे।
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संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन से सांठ-गांठ के चलते तत्कालीन एमडी ने इन्हें सर्किल से अटैच कर दिया है। इस बीच एसोसिएशन की आपत्ति पर 29 अक्तूबर को इनका ट्रांसफर हल्द्वानी कर दिया गया लेकिन 30 अक्तूबर को ही स्थानानंतरण निरस्त कर इन्हें वापस बुला लिया गया। फिलहाल प्रतीक्षारत ईई मुफ्त का वेतन ले रहे हैं।
एक तरफ तो पेयजल निगम घाटे में जा रहा है वहीं प्रबंधन द्वारा अधिकारियों को बिना कार्य के वेतन दिया जा रहा है। यह अत्यंत निंदनीय एवं सोचनीय स्थिति है। गुमराह करने के लिए जबरन कोर्ट में मामला होने की बात कही जा रही है।
- जीतेंद्र सिंह, महासचिव, सहायक अभियंता एसोसिएशन
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