नगर निकायों के चेयरमैन और ईओ अब लिपिक, बेलदार, चपरासी या पर्यावरण मित्र जैसे समूह-ग के पदों पर अपने चहेतों को नौकरी नहीं दे सकेंगे।
सरकार अब उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर केंद्रीयत और अकेंद्रीयत सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नई नियमावली बनाने जा रही है। यदि नियमावली तैयार हो जाती है और सरकार इसे मंजूरी दे देती है तो समूह-ग के पदों की भर्ती शासन स्तर से ही होगी। यही नहीं केंद्रीयत सेवाओं की तर्ज पर अकेंद्रीयत सेवाओं के कर्मचारियों का भी एक निकाय से दूसरे में स्थानांतरण किया जा सकेगा।
राज्य में लागू नगर निगम अधिनियम के तहत वर्तमान में नगर निकायों में केंद्रीयत और अकेंद्रीयत दो तरह के अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती होती है। केंद्रीयत कर्मचारियों की तैनाती तो शासन स्तर से होती है, लेकिन अंकेद्रीयत कर्मचारियों की तैनाती नगर निकायों के स्तर पर चेयरमैन और ईओ द्वारा की जाती है।
अकेंद्रीयत कर्मचारियों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने की भी शिकायतें आती रहती हैं। इसी को देखते हुए अब शहरी विकास विभाग ने नई नियमावली बनाने का निर्णय लिया है। नियमावली में ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं जिसके तहत अब समूह-ग के पदों की भर्ती स्थानीय नगर निकाय के स्तर पर न करके लोकसेवा आयोग या फिर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से कराने की है।
नाम न छापने की शर्त पर शहरी विकास विभाग के एक अफसर ने बताया कि यदि नियमावली को मंजूरी मिल जाती है तो इससे न सिर्फ स्वच्छ, पारदर्शी प्रक्रिया अपनायी जा सकेगी, वरन नगर निकायों में एक ही कुर्सी पर सेवानिवृत्त तक नौकरी करने वाले अधिकारियों और कर्मचरियों को एक निकाय से दूसरे निकाय में भी स्थानांतरण किया जा सकेगा। यही नहीं नई नियमावली लागू होने के बाद वित्तीय संकट से जूझ रहे नगर निकायों को भी आर्थिक संकट से उबारने में मदद मिलेगी।