सिटी बसों में महिलाओं को बैठने के लिए सीट तक नहीं मिल रही है तो यात्री बेटिकट यात्रा कर रहे हैं। इस बात का खुलासा सोमवार को तब हुआ जब आरटीओ (प्रवर्तन) ने गोपनीय तरीके से सिटी बसों में सफर किया। उन्होंने सिटी बस में तमाम खामियां पाए जाने पर चालान की कार्रवाई की।
राज्य परिवहन प्राधिकरण और संभागीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक में लिए गए निर्णयों के मुताबिक सिटी बसों में महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा चालक-परिचालकों के लिए वर्दी की व्यवस्था की गई है। साथ ही यात्रियों का टिकट काटना भी अनिवार्य किया हुआ है। बावजूद इसके चालक-परिचालक मनमानी कर रहे हैं।
लगातार मिल रहीं शिकायतों पर सोमवार को ऑरटीओ (प्रवर्तन) शैलेश तिवारी ने विभागीय टीम के साथ गोपनीय तरीके से सिटी बस में सफर किया। आरटीओ ने जब परिचालक से टिकट देने को कहा तो उसने पैसे तो ले लिए, लेकिन बदले में कोई टिकट नहीं दिया। इस दौरान आरटीओ ने पाया कि सिटी बस में महिलाओं की सीटों पर पुरुष सफर कर रहे हैं। जबकि महिलाएं खड़े होकर सफर कर रहीं हैं। आरटीओ ने जब चालक-परिचालक से महिलाओं के लिए सीटें मुहैया नहीं कराने के बारे में पूछा तो वे हक्के बक्के रह गए। इसके बाद उन्होंने महिलाओं के लिए सीटें खाली कराईं।
आरटीओ ने यात्रियों को टिकट नहीं दिए जाने पर भी कड़ी नाराजगी जताई। आरटीओ ने बताया कि प्रावधानों के मुताबिक 25 सीट क्षमता वाली सिटी बसों में छह सीटें और 26 से लेकर 35 सीटों वाली गाड़ियों में महिलाओं के लिए दस सीटें आरक्षित हैं। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को भी इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।