उत्तराखंड शिक्षा विभाग विकलांग और बीमार शिक्षकों के अटैचमेंट समाप्त कर भले उन्हें पहाड़ चढ़ाने पर आमादा हो, लेकिन प्रदेश में मंत्रियों के चहेते सिफारिशी शिक्षकों के लिए कोई नियम कानून नहीं है।
हाल ये है कि पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों में तैनात कुछ शिक्षक स्कूल छोड़कर शिक्षा निदेशालय तो कुछ मंत्रियों के दफ्तरों में जमे हैं। शुक्रवार को तीन साल से शहरी विकास मंत्री के कार्यालय में जमे एक और शिक्षक की दो साल के लिए प्रतिनियुक्ति बढ़ा दी गई है।
ऐसे में पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को पढ़ाई का नुकसान उठाना पड़ रहा है। टिहरी जिले के राजकीय इंटर कॉलेज भवान में तैनात सहायक अध्यापक एलटी सूरत सिंह पंवार पिछले तीन साल से स्कूल न जाकर शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार के कार्यालय में जमे हैं।
शहरी विकास मंत्री के निर्देश के बाद शासन ने शुक्रवार को इनकी दो साल की प्रतिनियुक्ति और बढ़ा दी है। यह हाल तब है जबकि मुख्यमंत्री हरीश रावत व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने के दावे कर रहे हैं। बताया गया कि इसके अलावा जीआईसी बुल्लावाला के प्रशासनिक अधिकारी को भी शिक्षा निदेशालय में अटैच किया गया है।
ये भी ‘शिक्षा’ छोड़ ‘कृषि’ में जमे
कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने पहले सहसपुर की खंड शिक्षा अधिकारी दमयंती रावत को शिक्षा विभाग से अपने विभाग में लाकर उन्हें बीज प्रमाणीकरण की निदेशक बना दिया। इसके बाद अपने बहनोई प्रवक्ता यशवंत बर्त्वाल को भी प्रतिनियुक्ति पर कृषि विभाग में ला चुके हैं।
शिक्षा महानिदेशक बोले, होगी जांच
प्रदेश में शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में भेजा गया है। कुछ शिक्षक प्रतिनियिुक्ति पर हैं, लेकिन उनका कार्यकाल पूरा होते ही उन्हें भी विद्यालयों में भेजा जाएगा। यदि कोई शिक्षक अब भी अटैच है या फिर प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद भी अपने मूल विद्यालय में नहीं गया तो इसकी जांच करवाई जाएगी।
- डी सेंथिल पांडियन, शिक्षा महानिदेशक