पिछले दिनों सूबे के सियासी संकट का नुकसान सबसे ज्यादा जनपद रुद्रप्रयाग को झेलना पड़ा है। आज नौबत यह आ गई है कि इस जिले का विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं बचा। जिले में विधानसभा की दो सीटें हैं, और दोनों के विधायकों हरक सिंह रावत व शैला रानी रावत की सदस्यता निरस्त हो चुकी है।
शासन ने सदस्यता खोने वाले विधायकों की निधि भी रोक दी है। ऐसे में इस जिले के विकास व अन्य समस्याओं के समाधान की वकालत करने वाला कोई विधायक नहीं रहा है।
जिले की दो सीटों में रुद्रप्रयाग से हरक सिंह रावत और केदारनाथ से शैलारानी रावत विधायक निर्वाचित हुई थीं। हाल के दिनों में कांग्रेस पार्टी से बगावत कर भाजपा के पाले में जाने वाले नौ विधायकों में ये दोनों भी शामिल हैं। हरक सिंह रावत तो इस विद्रोह का सीधे नेतृत्व कर रहे थे। इसके बाद ही सरकार अल्पमत में आई थी।