दून अस्पताल में जब भी मस्तिष्क की अति गंभीर सर्जरी होती है तो ओटी असिस्टेंट बाहर से बुलाने पड़ते हैं।
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सुपर स्पेशलिस्ट तो है लेकिन न्यूरो ओटी और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। बाहर से असिस्टेंट बुलाने की मजबूरी यह है कि दून में सुपर स्पेशलिस्ट का पद नहीं है। यहां सुपर स्पेशलिस्ट को स्पेशलिस्ट का पद और तनख्वाह देकर काम चलाया जा रहा है।
न्यूरो सर्जन का पद सृजित नहीं
दून अस्पताल का यह हाल तब है जबकि इसे मेडिकल कॉलेज में तब्दील किया जा रहा है। न्यूरो सर्जन का पद सृजित न होने से मरीजों को सहूलियतें नहीं मिल रही हैं। यह पद होता तो अस्पताल में न्यूरो आपरेशन थिएटर बन जाता और न्यूरो सर्जरी के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती हो जाती है।
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डॉक्टरों का कहना है कि अगर न्यूरो सर्जन का पद होता तो नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) के तहत ओटी और स्टाफ की व्यवस्था हो जाती। न्यूरो सर्जरी में एमसीएच डॉ. डीपी तिवारी गढ़वाल रीजन के इकलौते न्यूरो सर्जन हैं। इस वक्त दून अस्पताल में वह सामान्य सर्जन के पद पर कार्य कर रहे हैं।
वेतन कम
इससे उन्हें वेतन कम मिल रहा है। डॉ. तिवारी को यहां काम करते हुए एक साल हो गया है। उन्होंने बताया कि न्यूरो ओटी और प्रशिक्षित स्टाफ के लिए वह महानिदेशालय प्रस्ताव भेज चुके हैं।
न्यूरो सर्जरी के पद के सृजन के संबंध में स्वास्थ्य महानिदेशालय ने फाइल तैयार कर ली है। लेकिन फाइल एक साल से वित्त विभाग में पड़ी है।
डॉ. तिवारी ने बताया कि न्यूरो सर्जरी सामान्य आपरेशन थिएटर में कर रहे हैं। गंभीर मामलों में विशेष ओटी और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है।
न्यूरो सर्जन के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। डॉ. डीपी तिवारी की सेवाएं ले रहे हैं। अभी न्यूरो सर्जन का सैलरी स्लैब तैयार नहीं हुआ है। पद सृजित हो जाएगा।
- डॉ. जीएस जोशी, महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
न्यूरो के मरीजों को सुविधाएं मिल रही हैं। अन्य सुविधाओं के लिए महानिदेशालय को प्रस्ताव भेजा गया है। व्यवस्था को अपडेट किया जाता रहेगा।
- डॉ. आरएस असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल
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