केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हमें अब भारत में बेरोजगारों की फौज नहीं खड़ी करनी है। शिक्षा वही दी जाएगी, जिससे युवाओं को रोजगार मिले और वे अपने भविष्य को अपने हिसाब से दिशा दे सकें। यह बात उन्होंने उच्च शिक्षा नीति पर आयोजित कार्यक्रम में एक शोध छात्रा के प्रश्न के उत्तर में कही। इस दौरान उन्होंने नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के सुझाव को भी शामिल करने का वादा किया।
डॉ. निशंक एमकेपी कॉलेज में नई शिक्षा नीति के मसौदे को बता रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारत के स्वर्णिम इतिहास और शिक्षा में विश्व को दिए गए ज्ञान के बारे में बताया। इस पर एसजीआरआर कॉलेज की राजनीति शास्त्र की शोध छात्रा अंजली सेमवाल ने उनसे एक रिपोर्ट के आधार पर प्रश्न पूछा था। प्रश्न था कि उत्तराखंड में लगातार शिक्षण संस्थानों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन छात्रों की संख्या घट रही है। कारण है कि शिक्षा रोजगारपरक नहीं है, क्या यह बात सही है?
इस पर डॉ. निशंक ने बीएड कॉलेजों का उदाहरण देते हुए बताया कि देश में हर साल इन कॉलेजों से 19 लाख से ज्यादा छात्र पासआउट होते हैं, लेकिन इनके सापेक्ष केवल तीन से साढ़े तीन लाख शिक्षक ही बन पाते हैं। जबकि बचे हुए छात्र शिक्षक बनने की चाह में संघर्ष करते रहते हैं। डॉ. निशंक ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ कि बीएड कॉलेजों को बिना देखे ही मान्यता दी जाने लगी, जिससे उनकी और वहां से निकलने वाले छात्रों की फेहरिस्त लंबी हो गई और बेरोजगारी बढ़ती रही। लेकिन, नई शिक्षा नीति में इस तरह की व्यवस्था नहीं होगी। सिर्फ ऐसे संस्थान खोले जाएंगे जो कि रोजगार मुहैया करा सकें।
कार्यक्रम में डॉ. निशंक ने भारत के मौजूदा हालातों और सरकार के प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने वैदिक शिक्षा, आयुर्वेद आदि पर भी शोध करने को जरूरी बताया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत, एमकेपी की प्राचार्या डॉ. सुनीता कुमार, सचिव जितेंद्र सिंह नेगी, डॉ. चेतना पोखरियाल, डॉ. ममता सिंह, सदस्य डॉ. पुनीत सैनी आदि उपस्थित रहे।
नई शिक्षा नीति की कुछ प्रमुख बातें
- शिक्षण संस्थानों में दीक्षांत समारोह के साथ-साथ दीक्षारंभ समारोह भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे नए छात्रों को संस्थान में अपनेपन का अहसास हो।
- वर्तमान में शिक्षा का अधिकार आठवीं कक्षा तक है, लेकिन इसे बढ़ाकर 12वीं तक किया जाएगा। इससे देश में हर कोई गुणवत्तापरक शिक्षा पा सकेगा।
- 3 से 5 वर्ष तक बच्चों की सीखने की क्षमता सबसे अधिक होती है। इसको पहचाना जा सके ऐसी व्यवस्था शिक्षा नीति में की जा रही है।
- सीबीएसई पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल किया जा रहा है। इससे छात्रों की सीखने की ललक व क्षमता को बढ़ाया जा सकेगा।
- उत्तराखंड के जन, वन और जल में समन्वय स्थापित कर शोध किए जाएंगे। यह आने वाले समय में दुनिया के सामने नई मिसाल होगी।
- (डॉ. निशंक के अनुसार)
मोबाइल पर मिलेगी डिग्री
कार्यक्रम में राज्य के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि ढाई सालों में उच्च शिक्षा में बहुत बड़े सुधार किए गए हैं। इनमें अब छात्रों की डिग्री से संबंधित व्यवस्था की जा रही है। इससे उन्हें डिग्री के लिए भटकना नहीं होगा। बल्कि ऑनलाइन आवेदन कर डिग्री उनके मोबाइल पर ही मिल जाएगी।
एमकेपी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित छात्राएं,अध्यापिकाएं व अन्य ।
एमकेपी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम सेमिनार का दीप प्रज्जवलित करके शुभारंभ करते केंद्रीय मंत्री ?