आठ सौ करोड़ के उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को डाक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। केंद्र सरकार योजना को मंजूर कर चुकी है, लेकिन इंफ्रास्ट्रकचर की कमी की वजह से इसका काम शुरू नहीं हो पाया है।
स्वास्थ्य विभाग से इस परियोजना के लिए एक दर्जन स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए प्रतिनियुक्ति कर दी गई है, लेकिन धरातल पर उतारने के लिए डाक्टर और दूसरा पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं मिल पा रहा है।
केंद्र सरकार ने विश्व बैंक पोषित उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डवलपमेंट प्रोजेक्ट फेज-2 को मंजूरी दे दी है। आठ सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट में राज्य सरकार भी तकरीबन दो सौ करोड़ रुपये अपना शेयर देगी। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलाया जाना है। फेज-2 प्रोजेक्ट के लिए भवन आवंटित कर दिया गया है। इसके साथ ही महानिदेशालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने एक दर्जन संयुक्त और सहायक निदेशक स्तर के एक दर्जन अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर प्रोजेक्ट में भेज दिया गया है।
प्रोजेक्ट के लिए डाक्टर और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डवलपमेंट प्रोजेक्ट फेज-1 जैसे हालात पैदा हो गए हैं। फेज-1 वर्ष 2007 में समाप्त हो चुका है। इसी तरह पहले फेज में भी डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी रही है जिससे प्रोजेक्ट सही ढंग से धरातल पर उतर ही नहीं पाया। इस बार भी विभाग को डाक्टर जुटाने के लाले पड़ रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत अस्पतालों का इंफ्रास्ट्रकचर भी सुधारा जाना है और कई प्रोजेक्ट पीपीपी मोड पर चलाए जाएंगे।
उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत टिहरी और खटीमा के दो-दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी मोड पर चलाया जाना है। इसके अलावा निजी एजेंसियों को मोड के तहत विशेषज्ञ सेवाओं के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सीएचसी, पीएचसी और अस्पतालों में उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डवलपमेंट प्रोजेक्ट फेज-2 में एक कंपोनेंट डाक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता मुहैया कराए जाने का भी है। इसमें डाक्टरों के साथ स्टाफ को भी आउटसोर्स किया जाएगा।
- डा. नीरज खैरवाल, प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम