उत्तराखंड ने संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा पर अमल न करके संयुक्त राष्ट्र संघ का अपमान किया है। संयुक्त राष्ट्र की घोषणा पर अमल करते हुए 11 दिसंबर को विश्व के कई देशों में पहाड़ दिवस मनाया गया।
लेकिन इस दिन पर्वतीय प्रदेश उत्तराखंड में सन्नाटा पसरा रहा। सरकार से लेकर गैर सरकारी संगठनों ने भी चुप्पी ओढ़े रखी।
2003 में पर्वतीय क्षेत्रों को विशिष्ट मानते हुए संयुक्त राष्ट्र ने हर साल 11 दिसंबर को पहाड़ दिवस के आयोजन का ऐलान किया था। तब से हर साल एक खास थीम के साथ पूरे विश्व में पहाड़ दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
इस बार की थीम पर्वतीय खेती थी और यह उत्तराखंड के लिए मायने भी रखती है। बात-बात पर आयोजन करने वाली राज्य सरकार और गैर सरकारी संगठनों को भी याद नहीं आया कि पहाड़ दिवस पर कोई आयोजन भी किया जा सकता है। सत्ता पक्ष 18 दिसंबर को दिल्ली में प्रस्तावित धरने की तैयारी में ही उलझा हुआ है।
कांग्रेस प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप के मुताबिक उन्हें पहाड़ दिवस की कोई जानकारी ही नहीं है। दिल्ली में आईएमआई ने सम्मेलन का आयोजन किया, उसी में मुख्यमंत्री शामिल हुए थे। अलबत्ता, दिल्ली में इंटीग्रेटेड माउंटेन इनीशिएटिव (आईएमआई) ने पहल की है।
दिल्ली में हिमालयी राज्यों के सम्मेलन के अंतिम दिन आईएमआई ने हर साल 11 दिसंबर को दिल्ली में पर्वतीय राज्यों का सम्मेलन करने का फैसला किया।
आईएमआई के अध्यक्ष डॉ. आरएस टोलिया के मुताबिक इस आयोजन में अन्य देशों की पर्वतीय संस्थाओं और लोगों को भी जोड़ लिया गया है। इस बार आईएमआई की मुख्य थीम भी पर्वतीय खेती ही थी।